यूएई में जानवरों के लिए सिप्रोफ्लोक्सासिन दवा के इस्तेमाल पर रोक, एमिरेट्स ड्रग एस्टेब्लिशमेंट ने 1 नवंबर से लागू किया फैसला

दुबई: एमिरेट्स ड्रग एस्टेब्लिशमेंट (EDE) ने जानवरों के इलाज में सिप्रोफ्लोक्सासिन एंटीबायोटिक के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया है। यह फैसला 1 नवंबर 2026 से प्रभावी होगा। इस कदम का मुख्य उद्देश्य एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस से लड़ना और इंसानों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं की प्रभावशीलता को बचाए रखना है।
EDE ने इस एंटीबायोटिक समूह को 'क्रिटिकली इम्पोर्टेंट एंटीमाइक्रोबियल्स' (CIAs) की श्रेणी में रखा है क्योंकि इनका उपयोग बैक्टीरियल इन्फेक्शन के इलाज में किया जाता है। यह निर्णय वैज्ञानिक आंकड़ों और यूएई यूनिवर्सिटी के अध्ययनों के आधार पर लिया गया है, जिसमें जानवरों में इस दवा के गलत इस्तेमाल से जुड़े जोखिमों को बताया गया था।
मेडिकल प्रोडक्ट्स रेगुलेशन सेक्टर की एक्टिंग एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर डॉ. रुकैया अकील अल बस्ताकी ने बताया कि नियामक कार्रवाई वैज्ञानिक सबूतों और विभिन्न क्षेत्रों के जोखिम मूल्यांकन के आधार पर तय की जाती है। उन्होंने कहा कि संस्थान सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा और फार्मास्युटिकल सुरक्षा बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
इस प्रतिबंध के दायरे में सिप्रोफ्लोक्सासिन वाले सभी पशु चिकित्सा उत्पाद और कच्चे माल शामिल हैं। कुल नौ उत्पाद प्रभावित हुए हैं, जिनमें आठ आयातित और एक स्थानीय स्तर पर पंजीकृत उत्पाद है।
संबंधित कंपनियों को इन उत्पादों के निर्माण, आयात और आपूर्ति को रोकने का निर्देश दिया गया है। कंपनियों को 1 नवंबर की समय सीमा से पहले बाजार से मौजूदा स्टॉक वापस लेना होगा और उन्हें स्वीकृत प्रक्रियाओं के अनुसार या तो दोबारा निर्यात करना होगा या नष्ट करना होगा।
कंपनियों के लिए यह अनिवार्य है कि वे अनुपालन की पुष्टि करने वाले दस्तावेज जमा करें। EDE एक निगरानी योजना तैयार कर रहा है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि तय समय के भीतर सभी जरूरी कदम उठाए गए हैं।