UAE का बड़ा फैसला, बैंक मिल्ली ईरान की सभी शाखाओं पर लगाया बैन, वित्तीय लेनदेन बंद.

यूएई सेंट्रल बैंक ने ईरान के सबसे बड़े बैंक यानी बैंक मिल्ली ईरान की सभी शाखाओं पर कड़ा प्रतिबंध लगा दिया है। इस नए आदेश के बाद अब बैंक की यूएई में मौजूद सभी आठ शाखाएं और क्षेत्रीय कार्यालय किसी भी प्रकार का वित्तीय लेनदेन नहीं कर पाएंगे। इस पाबंदी से ईरान के साथ होने वाले व्यापारिक वित्तपोषण और फंड ट्रांसफर पर पूरी तरह से रोक लग गई है और देश से दिरहम को बाहर भेजने या लाने की अनुमति नहीं होगी।
नियमों के उल्लंघन पर हुई बड़ी कार्रवाई
यूएई सेंट्रल बैंक की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक यह बैन नियमों और कानूनों के गंभीर उल्लंघन के बाद लगाया गया है। बैंक मनी लॉन्ड्रिंग, आतंकवाद के वित्तपोषण और प्रसार-वित्तपोषण से जुड़े नियमों का पालन करने में असफल रहा था। साल 2025 के सेंट्रल बैंक कानून के आर्टिकल 168-1-C के तहत इस नियामक कार्रवाई को अमलीजामा पहनाया गया है। इस सख्ती से उन ईरानी प्रवासियों और व्यापारियों को बड़ा झटका लगा है जो दुबई का इस्तेमाल वित्तीय सेवाओं के लिए करते थे।
क्षेत्रीय तनाव और अमेरिका के पुराने कदम
यह ताजा कदम यूएई द्वारा पिछले महीने ईरान के साथ सभी प्रकार के व्यापार, वाणिज्यिक आदान-प्रदान और वित्तीय लेनदेन को निलंबित करने के बाद उठाया गया है। इससे पहले ईरानी बलों द्वारा यूएई के पानी की तरफ बैलिस्टिक मिसाइल दागने और होर्मुज जलडमरूमध्य में यूएई से जुड़े टैंकरों पर हमले के आरोप लगे थे। इसके अलावा अमेरिका ने भी पहले ही अपनी इकोनॉमिक आउटकास्ट कैंपेन के तहत बैंक मिल्ली की दुबई शाखा के निदेशक पर प्रतिबंध लगा रखा है। इन तमाम घटनाक्रमों की पुष्टि 23 सितंबर 2026 को यूएई सेंट्रल बैंक, द नेशनल, रॉयटर और डब्ल्यूएएम जैसे आधिकारिक स्रोतों द्वारा की गई है।
सीमा पर जारी है संघर्ष और तनाव
क्षेत्र में चल रहे सैन्य संघर्ष के बीच पिछले गुरुवार को सऊदी समर्थित यमनी सरकारी बलों ने हूती विद्रोहियों के उस प्रयास को नाकाम कर दिया जिसमें वे ताइज़ को अदन से जोड़ने वाले महत्वपूर्ण सप्लाई रूट हेजत अल-अब्द पहाड़ के रास्ते को काटना चाहते थे। ईरान समर्थित हूती बलों ने हाल ही में यमन के लाल सागर तट और बाब अल-मंडेब के पास के इलाकों पर कब्जा कर लिया है जिससे तेल परिवहन के रास्ते और ज्यादा प्रभावित हुए हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य में लगातार अस्थिरता और संयुक्त राष्ट्र में ट्रंप-जीसीसी बैठक में किसी ठोस नतीजे पर न पहुंचने के कारण गुरुवार को खाड़ी के शेयर बाजारों में भी गिरावट दर्ज की गई।