UAE Base Rate Update: सेंट्रल बैंक ऑफ UAE ने बढ़ाया बेस रेट, जानिए आम लोगों पर क्या पड़ेगा असर.

यूएई के सेंट्रल बैंक यानी Central Bank of the UAE (CBUAE) ने अपने बेस रेट में बढ़ोतरी का ऐलान कर दिया है। यह नया बदलाव ओवरनाइट डिपॉजिट फैसिलिटी पर लागू होगा, जिसे 25 basis points यानी 0.25% बढ़ाकर 3.65% से सीधा 3.90% कर दिया गया है। यह नया नियम गुरुवार, 17 सितंबर 2026 से प्रभावी होगा। इस फैसले के बाद यूएई में रहने वाले आम नागरिकों और खासकर वहां बसने वाले भारतीय प्रवासियों के लिए लोन और वित्तीय लेन-देन से जुड़ी बातें काफी अहम हो गई हैं।
यूएई का यह फैसला अमेरिकी सेंट्रल बैंक यानी US Federal Reserve द्वारा रिजर्व बैलेंस पर ब्याज दरें 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाने के ठीक बाद आया है। जैसा कि हम सब जानते हैं कि यूएई की करेंसी दिरहम यानी UAE dirham अमेरिकी डॉलर से जुड़ी यानी pegged है। इसी वजह से CBUAE अपनी मौद्रिक नीति के लिए बेस रेट को मुख्य पैमाना मानता है। बैंक शॉर्ट-ترم लिक्विडिटी के लिए अपनी स्टैंडिंग क्रेडिट फैसिलिटी को बेस रेट से 50 basis points ऊपर ही लागू रखता है।
भारतीय प्रवासियों पर क्या होगा असर
भारत सरकार के विदेश मंत्रालय यानी India's Ministry of External Affairs के मार्च 2026 तक के आंकड़ों के मुताबिक, यूएई में लगभग 4.326 million यानी 43 लाख से ज्यादा भारतीय नागरिक रहते हैं। इनमें से बहुत से लोग नौकरीपेशा हैं, छोटे-मोटे बिजनेस चलाते हैं या फिर पर्सनल लोन, कार लोन और होम लोन के लिए बैंक से जुड़े हैं। ऐसे में ब्याज दरें बढ़ने से लोगों के मन में अपने लोन की ईएमआई को लेकर चिंता होना लाजिमी है। हालांकि, कर्ज की लागत पर इसका असर इस बात पर निर्भर करेगा कि आपका लोन फिक्स रेट पर है या फिर वेरिएबल रेट पर, साथ ही बैंक का नियम और रीसेट पीरियड क्या है।
EIBOR के आंकड़े और लोन की स्थिति
CBUAE द्वारा जारी 16 सितंबर के आधिकारिक ईईबोर यानी EIBOR फिक्सिंग आंकड़ों के मुताबिक, अलग-अलग अवधियों के लिए दरें इस प्रकार थीं:
| EIBOR Period | Rate |
|---|---|
| Overnight EIBOR | 3.40735% |
| One-month EIBOR | 3.99246% |
| Three-month EIBOR | 4.12877% |
| Six-month EIBOR | 4.20398% |
| One-year EIBOR | 4.81103% |
यदि आपके पास होम लोन या कोई अन्य कर्ज है, तो आपको अपने लोन समझौते यानी एग्रीमेंट को ध्यान से देखना चाहिए। इसमें यह देखना जरूरी है कि वर्तमान सालाना ब्याज दर क्या है, दर फिक्स है या बदलती रहती है और अगली बार रेट कब बदलेगा। होम लोन लेने वाले लोगों को अपने फिक्स पीरियड के खत्म होने की तारीख और उसके बाद लागू होने वाले मार्जिन की जानकारी जरूर रखनी चाहिए। जो लोग लोन ट्रांसफर या रीफाइनांस कराने की सोच रहे हैं, उन्हें केवल ब्याज के अंतर को देखने के बजाय प्रोसेसिंग फीस, वैल्यूएशन चार्ज, बीमा और दूसरे खर्चों का भी हिसाब लगाना चाहिए।
बचत करने वालों और रेमिटेंस के लिए स्थिति
जो लोग बैंक में पैसे बचाते हैं और टर्म डिपॉजिट में निवेश करते हैं, उन्हें बैंकों द्वारा मिलने वाले नए ऑफर्स पर नजर रखनी चाहिए। साथ ही अपनी पैसों की जरूरत और रिन्यूअल की शर्तों को भी समझना चाहिए। जहां तक भारत पैसे भेजने यानी रेमिटेंस का सवाल है, तो CBUAE द्वारा ब्याज दर बढ़ाने से AED से INR यानी दिरहम से भारतीय रुपये के एक्सचेंज रेट पर कोई सीधा या अपने आप असर नहीं पड़ता है। रुपये और दिरहम का मूल्य पूरी तरह से USD-INR की चाल, ग्लोबल करेंसी मार्केट और पैसे भेजने वाली कंपनियों के चार्ज पर निर्भर करता है।