जलवायु परिवर्तन के खतरों से लोगों को बचाने के लिए यूएई स्वास्थ्य मंत्रालय ने 2026 से 2031 तक का हेल्थ प्लान लॉन्च किया

अबू धाबी: यूएई के स्वास्थ्य और रोकथाम मंत्रालय (MoHAP) ने जलवायु परिवर्तन के बढ़ते असर से जनता की सेहत को सुरक्षित रखने के लिए 'हेल्थ सेक्टर क्लाइमेट एडैप्टेशन प्लान (2026-2031)' की शुरुआत की है। 21 अक्टूबर 2026 को अबू धाबी फ्यूचर हेल्थ समिट में इस राष्ट्रीय पहल का आधिकारिक ऐलान किया गया। इस योजना का मुख्य मकसद जलवायु संकट के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं की मजबूती सुनिश्चित करना है।
इस कार्यक्रम के दौरान स्वास्थ्य और रोकथाम मंत्री अहमद अली अल सयेघ, जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण मंत्रालय की सहायक अवर सचिव डॉ. अलानौद अब्दुल्ला अलहाज और MoHAP के पब्लिक हेल्थ सेक्टर के सहायक अवर सचिव डॉ. हुसैन अल रंद समेत कई अधिकारी मौजूद थे। इस रणनीति को जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण मंत्रालय तथा अन्य स्वास्थ्य अधिकारियों के समन्वय से तैयार किया गया है।
यह योजना यूएई के नेशनल क्लाइमेट चेंज एडैप्टेशन प्लान और COP28 यूएई डिक्लेरेशन ऑन क्लाइमेट एंड हेल्थ जैसी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं के अनुरूप है। मंत्री अल सयेघ ने बताया कि यूएई के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि सरकार गर्मी, धूल और खराब मौसम जैसे जलवायु जोखिमों के बीमारी बनने से पहले ही उनसे निपटने की तैयारी कर रही है।
रणनीति के तहत अर्ली वार्निंग सिस्टम बनाने और पर्यावरण नीतियों के साथ रिसर्च को जोड़ने पर जोर दिया गया है ताकि बचाव के कदम उठाए जा सकें। स्थानीय जलवायु स्थितियों के आकलन के आधार पर इस प्लान में छह मुख्य क्षेत्रों पर ध्यान दिया जाएगा। इनमें गर्मी से होने वाली बीमारियां जैसे हीट स्ट्रोक, अत्यधिक गर्मी से हृदय रोग, खराब हवा और धूल से सांस की समस्याएं, वेक्टर-जनित रोग, पानी और भोजन से होने वाली बीमारियां और जलवायु बदलाव से मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले असर शामिल हैं।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य डेटा और विशेषज्ञता का उपयोग करके बीमारियों के पैटर्न का समय पर पता लगाना है। इसके जरिए समुदाय के लिए खास तौर पर तैयार किए गए बचाव के उपाय मुहैया कराए जाएंगे।