सऊदी अरब पर हूती मिसाइल हमलों को यूएई ने बताया संप्रभुता का उल्लंघन और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए खतरा
यूएई ने सऊदी अरब पर हूती मिसाइल और ड्रोन हमलों को संप्रभुता का उल्लंघन बताया। अमेरिका ने अपने कर्मियों को सऊदी से हटाने का आदेश दिया।

अबू धाबी: संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने सऊदी अरब पर हुए हालिया हूती मिसाइल और ड्रोन हमलों की कड़ी निंदा की है। यूएई विदेश मंत्रालय ने 25 अक्टूबर 2026 को जारी एक आधिकारिक बयान में इन हमलों को सऊदी अरब की संप्रभुता का खुला उल्लंघन बताया है। मंत्रालय के मुताबिक, इस तरह की हरकतें क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता के लिए एक बड़ा खतरा हैं।
सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने जानकारी दी कि उनके एयर डिफेंस सिस्टम ने दक्षिणी क्षेत्र को निशाना बनाने वाली 10 बैलिस्टिक मिसाइलों को सफलतापूर्वक रोक लिया। इसके बावजूद राजधानी रियाद में भी धमाकों की खबरें सामने आई हैं। इन घटनाओं के कारण इलाके की सुरक्षा स्थिति खराब हुई है, जिससे कामकाज पर बड़ा असर पड़ा है।
रियाद के किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट के दो टर्मिनलों पर कामकाज आंशिक रूप से फिर से शुरू हो गया है। हालांकि, हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सारी ने चेतावनी दी है कि यह एयरपोर्ट अभी भी उनका सैन्य लक्ष्य बना हुआ है। इससे पहले 10 अक्टूबर को हुए एक हमले में 13 लोगों की जान गई थी।
ताजा हमलों के दौरान खमिस मुशैत और अहद रफिदाह में मिसाइलों के मलबे के गिरने से दो लोग घायल हो गए। इन हादसों में तीन रिहायशी इमारतों और सात वाहनों को नुकसान पहुंचा है।
बढ़ते खतरों को देखते हुए अमेरिका के विदेश विभाग ने 23 अक्टूबर 2026 को अपने गैर-आपातकालीन सरकारी कर्मियों और उनके परिवारों को सऊदी अरब छोड़ने का आदेश दिया। अमेरिकी प्रशासन ने हूती हमलों से बढ़ते जोखिम और बुनियादी ढांचे व विमानन क्षेत्र को होने वाले खतरों का हवाला दिया है।
इन तनावपूर्ण हालातों की वजह से अल नासर और अल वस्ल के बीच होने वाला एशियन चैंपियंस लीग एलीट मैच स्थगित कर दिया गया है। इससे पहले 15 अक्टूबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने एक प्रस्ताव पारित कर नागरिक और ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हूती हमलों की निंदा की थी।
दूसरी ओर, तुर्की के रक्षा मंत्री यासर गुलेर ने स्पष्ट किया कि सऊदी अरब और पाकिस्तान के साथ मौजूदा रक्षा समझौतों के तहत तुर्की के सैनिकों के युद्ध में शामिल होने की उम्मीद नहीं है। उन्होंने बताया कि तुर्की का ध्यान फिलहाल क्षेत्रीय प्रतिरोध को बढ़ाने पर है।