UAE का बड़ा फैसला: आत्महत्या का प्रयास अब अपराध नहीं, मानसिक स्वास्थ्य पर जोर

संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने अपने न्यायिक इतिहास में एक मानवीय और बड़ा कदम उठाते हुए अपराध और दंड कानून (Crimes and Penalties Law) में महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं। नए संघीय डिक्री कानून के तहत, अब आत्महत्या के प्रयास को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया गया है। यह कानून गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होगा। सरकार का मुख्य उद्देश्य अब ऐसे व्यक्तियों को जेल भेजने के बजाय उन्हें मानसिक स्वास्थ्य सहायता, शुरुआती हस्तक्षेप और बचाव के जरिए मुख्यधारा में वापस लाना है।
उकसाने वालों के लिए सख्त सजा और कड़े प्रावधान
भले ही आत्महत्या के प्रयास को अपराध की श्रेणी से हटा दिया गया हो, लेकिन यूएई सरकार ने उन लोगों के खिलाफ सख्ती बढ़ा दी है जो दूसरों को ऐसा कदम उठाने के लिए उकसाते हैं या मदद करते हैं। नए प्रावधानों के अनुसार:
- सामान्य मामले: यदि कोई व्यक्ति किसी दूसरे को आत्महत्या के लिए उकसाता है और प्रयास विफल रहता है, तो दोषी को हिरासत में लिया जा सकता है, जुर्माना लगाया जा सकता है या दोनों सजाएं मिल सकती हैं।
- गंभीर चोट: यदि उकसावे के कारण व्यक्ति स्थायी रूप से विकलांग हो जाता है या 20 दिनों से अधिक समय तक अपने निजी काम करने में असमर्थ रहता है, तो अपराधी को 3 से 5 साल तक की जेल और जुर्माना हो सकता है।
- कमजोर वर्ग: नाबालिगों या मानसिक रूप से अक्षम लोगों को आत्महत्या के लिए उकसाने वालों को जानबूझकर की गई हत्या या हत्या के प्रयास के समान कड़ी सजा दी जाएगी।
- विदेशी नागरिक: इस तरह के अपराधों में दोषी पाए जाने वाले विदेशी नागरिकों को सजा पूरी होने के बाद देश से डिपोर्ट (निर्वासित) कर दिया जाएगा।
इसके अलावा, इस डिक्री में 'किसास' (प्रतिशोध) से संबंधित प्रावधानों में भी बदलाव किया गया है। अब उन मामलों में जेल की अवधि बढ़ा दी गई है जहां पीड़ित के वारिस प्रतिशोध के अपने अधिकार को छोड़ देते हैं। यह कदम सार्वजनिक सुरक्षा और निवारण को मजबूत करने के लिए उठाया गया है।
न्याय मंत्रालय द्वारा प्रस्तावित और राष्ट्रपति द्वारा अनुमोदित यह कानून यूएई की न्याय प्रणाली को आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है, जिसमें कानूनी दंड के साथ-साथ मानवीय गरिमा और मानवाधिकारों को प्राथमिकता दी गई है।