UAE की दोटूक, अब अमेरिका के भरोसे नहीं बैठेगा अरब, ईरान से आमने-सामने होगी बात.

खाड़ी देशों में सुरक्षा को लेकर चल रही उठापटक के बीच संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE के एक बड़े अधिकारी ने सीधी बात कही है। UAE के राष्ट्रपति के कूटनीतिक सलाहकार Anwar Gargash ने न्यूयॉर्क में चल रही एक बैठक के दौरान साफ किया कि अब अरब देशों को अपनी सुरक्षा के लिए सीधे ईरान के साथ बातचीत करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि क्षेत्र का भविष्य अब अकेले अमेरिकी और ईरानी बातचीत के जरिए तय नहीं होना चाहिए, क्योंकि इसका सीधा असर यहाँ रहने वाले आम लोगों और कामगारों पर पड़ता है।
क्षेत्रीय सुरक्षा और ईरान का रवैया
अधिकारी ने बताया कि ईरान लगातार क्षेत्र में अपनी मनमानी कर रहा है और अपने गल्फ के पड़ोसी देशों की जरूरतों को नजरअंदाज कर रहा है। हाल ही में यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब की राजधानी रियाद और Yanbu में अरामको की सुविधाओं पर मिसाइल और ड्रोन से हमले किए हैं। सऊदी के रक्षा तंत्र ने रियाद की तरफ आ रही एक बैलिस्टिक मिसाइल को हवा में ही नष्ट कर दिया, जिसके कारण किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उड़ानों को कुछ समय के लिए रोकना पड़ा था। इन सभी घटनाओं की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई हैं।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही घटी
समुद्री सुरक्षा की बात करें तो होर्मुज जलडमरूमध्य में हालात काफी बिगड़ चुके हैं। रॉयटर्स के शिपिंग डेटा के मुताबिक पिछले हफ्ते इस रास्ते से सिर्फ 17 कमोडिटी जहाज ही गुजर सके, जबकि उससे पिछले हफ्ते यह संख्या 37 थी और युद्ध से पहले रोजाना औसतन 125 जहाज यहाँ से निकलते थे। ईरान की संसद के स्पीकर Mohammad Bagher Ghalibaf ने कहा है कि यह रास्ता तब तक सीमित रहेगा जब तक अमेरिका क्षेत्र में चल रहे युद्धों को बंद नहीं करता, जमे हुए पैसों को वापस नहीं करता और नौसैनिक नाकाबंदी नहीं हटाता। आने वाले दिनों में संयुक्त राष्ट्र महासभा में ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian और Donald Trump के बीच संभावित मुलाकात भी हो सकती है।
अबू धाबी की मध्यस्थता और दुबई में शोक
UAE के अधिकारियों ने माना है कि आपसी विश्वास को दोबारा कायम करने में कई साल लग जाएंगे, लेकिन भौगोलिक स्थिति को देखते हुए गैर-आक्रमण और शिपिंग कॉरिडोर पर सीधी बातचीत करना बहुत जरूरी है। अबू धाबी ने इस मामले में मध्यस्थता करने की पेशकश की है और कूटनीति के साथ-साथ मजबूत सुरक्षा नीति अपनाने पर जोर दिया है। हालांकि गल्फ देशों के भीतर अभी भी कुछ मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं, जिसका उदाहरण ओमान में होने वाली बैठकों का टलना है। इसके साथ ही दुबई में शेख अहमद बिन राशिद अल मकतूम के निधन के बाद 10 दिनों के राजकीय शोक की घोषणा की गई है।