UAE ने सूडान में हथियार सप्लाई करने की खबरों को किया खारिज, यूएन की रिपोर्ट पर दिया कड़ा जवाब।

संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE ने सूडान के गृहयुद्ध में किसी भी पक्ष को हथियार या उससे जुड़ी सामग्री देने के आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। UAE सरकार ने साफ किया है कि जब से अप्रैल 2023 में यह संघर्ष शुरू हुआ है, तब से देश ने इस मामले में पूरी तरह निष्पक्ष रुख बनाए रखा है और किसी भी तरह की सैन्य मदद नहीं पहुंचाई है। यह बयान जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों में UAE के स्थायी मिशन की ओर से जारी किया गया है। यह प्रतिक्रिया संयुक्त राष्ट्र समर्थित स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय तथ्य-खोज मिशन यानी FFM द्वारा गुरुवार, 4 सितंबर 2026 को जारी की गई एक रिपोर्ट के बाद सामने आई है।
यूएन की रिपोर्ट में क्या सामने आया था
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद द्वारा अक्टूबर 2023 में गठित FFM की रिपोर्ट में यह निष्कर्ष निकाला गया था कि इस बात के पर्याप्त आधार हैं कि UAE से जुड़ी एक ट्रांसनेशनल नेटवर्क ने रैपिड सपोर्ट फोर्सेस यानी RSF को हथियार, रसद सहायता, ट्रेनिंग और विदेशी लड़ाके मुहैया कराए हैं। इस मिशन ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि लगभग 2,000 पूर्व कोलंबियाई सैन्य ठेकेदार कथित तौर पर RSF यूनिट्स की मदद के लिए तैनात किए गए थे, जो आधुनिक तोपखाने और ड्रोन्स के इस्तेमाल में सहायता कर रहे थे। इसके अलावा, रिपोर्ट में यह भी सुझाव दिया गया कि विदेशी सप्लाई वाले ड्रोन्स ने सूडानी सशस्त्र बलों यानी SAF की लंबी दूरी की मारक क्षमता को बढ़ाया है, जिससे नागरिकों की जान को बड़ा नुकसान पहुंचा है। जनवरी से मई 2026 के बीच इस संघर्ष की वजह से 1,000 से अधिक लोगों की मौत की खबरें सामने आई थीं।
UAE सरकार का आधिकारिक पक्ष और अंतरराष्ट्रीय कानून
अपने खंडन में UAE ने इस बात पर जोर दिया कि संघर्ष से जुड़े सभी आरोपों की जांच निष्पक्ष और साक्ष्य-आधारित तरीके से की जानी चाहिए। UAE सरकार ने SAF और RSF दोनों द्वारा किए गए मानवाधिकार उल्लंघनों की कड़ी निंदा की है और संयुक्त राष्ट्र के नियमों तथा अंतरराष्ट्रीय कानून के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को फिर से दोहराया है। अबू धाबी ने मौजूदा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के हथियार प्रतिबंध के प्रति अपने समर्थन को भी दोहराया और सूडान के सभी हिस्सों में इसके विस्तार की मांग की, ताकि युद्धरत गुटों को मिलने वाली बाहरी सैन्य मदद पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके।
नागरिक समाज और सुरक्षा परिषद की भूमिका
FFM ने UAE के इस इनकार को स्वीकार किया लेकिन साथ ही यह भी आग्रह किया कि देश को अपनी सीमाओं के भीतर काम करने वाले उन व्यक्तियों और कंपनियों की अधिक कठोरता से जांच करनी चाहिए जो सीमा पार हथियारों के नेटवर्क में शामिल हो सकते हैं। सूडानी नागरिक समाज संगठनों जैसे इमरजेंसी लॉयर्स ग्रुप और सिविल डेमोक्रेटिक अलायंस ऑफ द रेवोल्यूशनरी फोर्सेस यानी सोमौद ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से इन नेटवर्क्स के खिलाफ कार्रवाई को और सख्त करने की मांग की है। FFM के अध्यक्ष मोहम्मद चांडे ओथमान ने चेतावनी दी है कि इस बाहरी समर्थन का सबसे बुरा असर आम जनता पर पड़ रहा है और आम नागरिक इस संघर्ष की सबसे बड़ी कीमत चुका रहे हैं।