UAE और यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन के बीच व्यापार समझौता लागू, बढ़ेगा कारोबार

संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन (EAEU) के बीच एक बड़ा आर्थिक कदम उठाया गया है। मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026 से दोनों पक्षों के बीच आर्थिक साझेदारी समझौता (EPA) आधिकारिक तौर पर लागू हो गया है। इस समझौते के जरिए UAE अब आर्मेनिया, बेलारूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान और रूसी संघ के साथ व्यापारिक रिश्तों को एक नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए तैयार है।
इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य सीमा शुल्क (customs duties) को कम करना या पूरी तरह खत्म करना है, ताकि सामानों के आयात-निर्यात में आने वाली बाधाएं दूर हो सकें। इस समझौते के तहत 86 प्रतिशत से अधिक टैरिफ लाइनों पर तरजीही पहुंच दी जाएगी, जो वर्तमान व्यापार मूल्य के लगभग 96 प्रतिशत हिस्से को कवर करता है। उम्मीद जताई जा रही है कि इस कदम से साल 2032 तक दोनों पक्षों के बीच वार्षिक द्विपक्षीय व्यापार बढ़कर लगभग 50 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा।
व्यापार और अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा बड़ा असर
विदेश व्यापार मंत्री डॉ. थानी बिन अहमद अल ज़यौदी ने इस समझौते की अहमियत बताते हुए कहा कि यह डील निर्माताओं, निर्यातकों और सप्लाई-चेन पार्टनर्स के लिए एक व्यावहारिक प्लेटफॉर्म तैयार करेगी। यह पहल न केवल खाद्य सुरक्षा और सप्लाई-चेन को मजबूत करेगी, बल्कि कृषि, विनिर्माण, ऑटोमोटिव उत्पादों, लॉजिस्टिक्स, तकनीक और कीमती धातुओं जैसे क्षेत्रों में सहयोग को भी बढ़ावा देगी।
आंकड़ों पर नजर डालें तो UAE और EAEU के बीच गैर-तेल व्यापार में जबरदस्त उछाल देखा गया है। साल 2025 में यह व्यापार 33.6 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो 2024 के 29 अरब डॉलर के मुकाबले 16 प्रतिशत अधिक है। वहीं, 2026 की पहली छमाही में भी गैर-तेल व्यापार में 6.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो 14.3 अरब डॉलर रहा।
यह समझौता UAE के व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) कार्यक्रम का हिस्सा है। इसका लक्ष्य 2031 तक गैर-तेल विदेशी व्यापार को बढ़ाकर 4 ट्रिलियन दिरहम (1.1 ट्रिलियन डॉलर) तक ले जाना है। इस डील के जरिए EAEU के उत्पादकों को UAE के माध्यम से मध्य पूर्व, अफ्रीका और एशिया के बाजारों तक आसान पहुंच मिलेगी।