UAE Indian Consulate Alert: वीज़ा और नौकरी के नाम पर बायोमेट्रिक स्कैम, भारतीय तुरंत हो जाएं सावधान.

यूएई में रहने वाले भारतीय प्रवासियों के लिए एक बहुत बड़ी और जरूरी खबर सामने आई है। दुबई में स्थित Consulate General of India ने सोमवार, 31 अगस्त 2026 को एक आधिकारिक धोखाधड़ी चेतावनी जारी की है। इस चेतावनी में भारतीय नागरिकों, खास तौर से ब्लू-कॉलर वर्कर्स को फर्जी एजेंटों और स्कैमर्स से सतर्क रहने को कहा गया है जो वीज़ा और रेजिडेंसी सेवाओं के नाम पर लोगों की निजी जानकारी चुरा रहे हैं।
कैसे हो रहा है यह नया स्कैम
ठगों ने लोगों को फंसाने का एक खतरनाक तरीका निकाला है। वे खुद को सरकार द्वारा अधिकृत एजेंट बताकर लोगों से संपर्क करते हैं। इसके बाद वे वीज़ा रेगुलराइजेशन, इमरजेंसी सर्टिफिकेट, एग्जिट परमिट या फिर नई नौकरी दिलाने के बहाने लोगों से सेंसिटिव बायोमेट्रिक डेटा मांगते हैं। इसमें चेहरे की स्कैनिंग, आंखों के स्कैन और फिंगरप्रिंट के साथ-साथ पासपोर्ट और Emirates ID की कॉपी शामिल होती है। साधारण कामगार इन धोखेबाजों के जाल में आसानी से फंस जाते हैं क्योंकि वे कागजी कार्रवाई को बहुत असली जैसा दिखाते हैं।
डेटा चोरी होने से क्या हो सकता है नुकसान
काउंसिल ने साफ किया है कि इस तरह चुराई गई पहचान की जानकारी का इस्तेमाल बहुत गलत कामों के लिए किया जा रहा है। इन डेटा की मदद से धोखेबाज अवैध वित्तीय लेनदेन करते हैं, फर्जी बैंक खाते खोलते हैं, लोन लेते हैं या फिर क्रेडिट कार्ड जारी करवाते हैं। अगर किसी आम इंसान का डेटा चोरी हो गया और उसका गलत इस्तेमाल हुआ, तो उस बेकसूर व्यक्ति को भारी वित्तीय नुकसान, कानूनी पचड़ों और यात्रा प्रतिबंधों यानी ट्रेवल बैन का सामना करना पड़ सकता है।
सरकारी नियम और वीज़ा प्रक्रिया की सच्चाई
यूएई के नियमों के मुताबिक, किसी भी तरह का बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन सिर्फ सरकारी इमारतों या फिर अधिकृत सर्विस सेंटर्स पर ही किया जाता है। कंसुलेट ने स्पष्ट रूप से बताया है कि न तो दुबई में स्थित भारतीय महावाणिज्य दूतावास और न ही अबू धाबी स्थित भारतीय दूतावास पासपोर्ट या इमरजेंसी सर्टिफिकेट जारी करने के लिए कभी भी फिंगरप्रिंट, फेस स्कैन या आई स्कैन की मांग करता है। अगर कोई प्राइवेट व्यक्ति या एजेंट ऐसा मांगता है, तो यह खतरे की बहुत बड़ी घंटी है।
हेल्पलाइन और संचार चैनलों का दुरुपयोग
स्कैमर्स इतने शातिर हो चुके हैं कि उन्होंने पहले भी आधिकारिक संचार माध्यमों जैसे Pravasi Bharatiya Sahayata Kendra (PBSK) के टोल-फ्री और व्हाट्सएप नंबरों तक को स्पूफ किया है ताकि वे लोगों को असली लग सकें। दूतावास ने फिर से दोहराया है कि सरकारी मिशन कभी भी फोन या व्हाट्सएप पर पैसों की मांग नहीं करते और न ही वित्तीय मामलों पर चर्चा करते हैं। इस बारे में अधिक जानकारी के लिए आप Gulf News की रिपोर्ट देख सकते हैं।
क्या करें और किससे संपर्क करें
सभी नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने पासपोर्ट की कॉपी, एमिरेट्स आईडी डिटेल, चेहरे का स्कैन, फिंगरप्रिंट, आईरिस स्कैन या फिर बैंक से जुड़ी जानकारी किसी भी गैर-अधिकृत एजेंट को बिल्कुल न दें। जिन लोगों ने जाने-अनजाने में अपना ऐसा डेटा किसी को दे दिया है, उन्हें तुरंत वेरिफिकेशन और मार्गदर्शन के लिए प्रवासी भारतीय सहायता केंद्र से संपर्क करना चाहिए ताकि समय रहते किसी बड़े खतरे से बचा जा सके।