UAE: भारतीय प्रवासियों को ठगने वाला बड़ा गैंग सक्रिय, बायोमेट्रिक चोरी कर ले रहे हैं लोन

Praggya Singh sabal22 September 20263 min read0 viewsUAE
UAE: भारतीय प्रवासियों को ठगने वाला बड़ा गैंग सक्रिय, बायोमेट्रिक चोरी कर ले रहे हैं लोन

संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE में रहने वाले भारतीय प्रवासियों के लिए एक बड़ी और गंभीर चेतावनी सामने आई है। यहाँ कुछ फर्जी एजेंट और धोखेबाज लोग भारतीय कामगारों को अपना शिकार बना रहे हैं और उनकी निजी जानकारी जैसे कि चेहरे के स्कैन, फिंगरप्रिंट और आंखों के स्कैन जैसी बायोमेट्रिक डिटेल्स चुरा रहे हैं। इसके साथ ही लोगों के पासपोर्ट और Emirates ID भी हड़प लिए जा रहे हैं। लेबर कैंप्स, व्हाट्सएप ग्रुप्स और वीजा दफ्तरों के पास घूमने वाले ये शातिर लोग भोले-भाले कामगारों को आसानी से वीजा दिलाने या नौकरी लगवाने का झूठा झांसा देते हैं और फिर इस खतरनाक जाल में फंसा लेते हैं।

कैसे होता है इस फर्जीवाड़े का पूरा खेल

जब ये फ्रॉड करने वाले लोग किसी भारतीय प्रवासी के कागजात और बायोमेट्रिक डेटा हासिल कर लेते हैं, तो वे इसका गलत इस्तेमाल करते हैं। इन चोरों के पास लोगों की पहचान की पूरी नकल आ जाती है, जिससे वे बैंकों में डिजिटल ऑनबोर्डिंग यानी ऑनलाइन अकाउंट खोलने का काम करते हैं। इसके बाद पीड़ितों के नाम पर चुपचाप बैंक खाते खोल लिए जाते हैं, क्रेडिट कार्ड जारी करवा दिए जाते हैं और भारी-भरकम लोन मंजूर करवा लिए जाते हैं। इन सबकी भनक उस गरीब मजदूर को तब लगती है जब उसके सिर पर बैंक का भारी कर्ज आ चुका होता है और उसे कानूनी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

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यूएई में संयुक्त राष्ट्र संस्था UN DESA (2024) और विदेश मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, वहाँ लगभग 3.2 मिलियन यानी 32 लाख भारतीय मूल के लोग रहते हैं। इसके अलावा सऊदी अरब में 2 million और पूरे 6 GCC states में लगभग 10 million भारतीय रहते हैं। इन प्रवासी कामगारों के लिए अपनी पहचान और बायोमेट्रिक नियंत्रण खोना बहुत भारी पड़ रहा है। लोन और कर्ज का भुगतान न होने पर उनके लिए यूएई में रहना या वापस अपने देश भारत लौटना बेहद मुश्किल हो जाता है, क्योंकि बकाया रकम और कानूनी मामलों के कारण एयरपोर्ट पर रोक लग सकती है।

भारतीय समूदाय के लिए वाणिज्य दूतावास का सख्त कदम

इस गंभीर समस्या से निपटने और लोगों को जागरूक करने के लिए Consulate General of India in Dubai ने सोमवार, 21 September 2026 को दोपहर 2 pm से 4.30 pm तक एक विशेष ओपन-सेशन कानूनी शिविर आयोजित किया। यह पहल 'Seva Pakhwada' कार्यक्रम का हिस्सा थी, जिसका उद्देश्य दुबई और उत्तरी अमीरात में रहने वाले भारतीय नागरिकों को मुफ्त कानूनी सलाह देना था। इस शिविर से पहले वाणिज्य दूतावास ने 31 August 2026 को एक आधिकारिक एडवाइजरी भी जारी की थी, जिसमें साफ बताया गया था कि कई ब्लू-कॉलर मजदूर पहले ही इस धोखेबाजी का शिकार बन चुके हैं। भारतीय मिशन ने यह भी स्पष्ट किया कि भारतीय दूतावास या वाणिज्य दूतावास कभी भी पासपोर्ट या इमरजेंसी सर्टिफिकेट के लिए फिंगरप्रिंट या चेहरे के स्कैन की मांग नहीं करता है।

क्या सावधानी बरतनी चाहिए और कहाँ करें शिकायत

वाणिज्य दूतावास ने सभी प्रवासियों को स्पष्ट रूप से सलाह दी है कि वे अपने निजी दस्तावेज या वित्तीय विवरण किसी भी अनजान या अनधिकृत व्यक्ति को बिल्कुल न सौंपें। आधिकारिक तौर पर बायोमेट्रिक डेटा केवल यूएई सरकार के काउंटरों पर ही दिया जाना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति इस तरह के धोखेबाजों के संपर्क में आ चुका है या पीड़ित है, तो वह तुरंत Pravasi Bharatiya Sahayata Kendra (PBSK) से संपर्क कर सकता है। मदद के लिए टोल-फ्री नंबर 800 46342 पर कॉल किया जा सकता है, व्हाट्सएप या एसएमएस के लिए +971 54 309 0571 पर मैसेज भेजा जा सकता है, या फिर [email protected] पर ईमेल किया जा सकता है। PBSK ऐसे आपराधिक गतिविधियों से प्रभावित लोगों को लगातार कानूनी, व्यक्तिगत और वित्तीय परामर्श सेवाएं प्रदान कर रहा है।

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