दुबई: यूएई श्रम कानून के तहत ग्रेच्युटी और एंड-ऑफ-सर्विस लाभों को लेकर कर्मचारियों को मिली सलाह

यूएई श्रम मंत्रालय ने निजी क्षेत्र के कर्मचारियों को ग्रेच्युटी और एंड-ऑफ-सर्विस लाभों के नियमों के बारे में जानकारी दी है। पूरी जानकारी यहाँ पढ़ें।

Nura Basta31 October 20262 min read0 viewsUAE
दुबई: यूएई श्रम कानून के तहत ग्रेच्युटी और एंड-ऑफ-सर्विस लाभों को लेकर कर्मचारियों को मिली सलाह

दुबई: संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के मानव संसाधन और अमीरातीकरण मंत्रालय (MoHRE) ने दुबई और पूरे यूएई में काम करने वाले प्रवासी कर्मचारियों को एंड-ऑफ-सर्विस ग्रेच्युटी से जुड़े कानूनी ढांचे की याद दिलाई है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि निजी क्षेत्र के कर्मचारी, जिन्होंने कम से कम एक साल की निरंतर सेवा पूरी कर ली है, ग्रेच्युटी के हकदार हैं।

फेडरल डिक्री-लॉ नंबर 33 (2021) के मुताबिक, कर्मचारी चाहे इस्तीफा दे या उसे नौकरी से निकाला जाए, वह नोटिस पीरियड पूरा करने की शर्त पर ग्रेच्युटी पा सकता है। हालांकि, सेवा की अवधि की गणना करते समय बिना वेतन वाली छुट्टियों के दिनों को शामिल नहीं किया जाएगा।

ग्रेच्युटी का हिसाब कर्मचारी के आखिरी बेसिक वेतन के आधार पर किया जाता है। इसमें हाउसिंग, ट्रांसपोर्टेशन और यूटिलिटी जैसे भत्तों को शामिल नहीं किया जाता है। नियम के अनुसार, सेवा के पहले पांच वर्षों के लिए 21 दिनों का बेसिक वेतन और उसके बाद के हर अतिरिक्त वर्ष के लिए 30 दिनों का बेसिक वेतन दिया जाएगा।

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अधूरे वर्षों की गणना प्रो-राटा आधार पर की जाएगी। कुल ग्रेच्युटी भुगतान की अधिकतम सीमा दो साल के बेसिक वेतन के बराबर तय की गई है। नियोक्ताओं के लिए यह अनिवार्य है कि वे अनुबंध समाप्त होने की तारीख से 14 दिनों के भीतर सभी बकाया वेतन और एंड-ऑफ-सर्विस लाभों का निपटान करें।

MoHRE एक स्वैच्छिक बचत योजना (Savings Scheme) को भी बढ़ावा दे रहा है, जिसके तहत नियोक्ता एंड-ऑफ-सर्विस योगदान को अनुमोदित फंड में निवेश कर सकते हैं। यदि नियोक्ता इस योजना को चुनता है, तो उसे नामांकन से पहले कर्मचारी द्वारा अर्जित किसी भी ग्रेच्युटी का निपटान करना होगा, जिसके बाद पारंपरिक गणना की जगह निवेश योगदान ले लेगा।

वहीं, दुबई इंटरनेशनल फाइनेंशियल सेंटर (DIFC) के कर्मचारी DEWS योजना के तहत आते हैं। इसमें पांच साल से कम सेवा वाले कर्मचारियों के लिए बेसिक वेतन का 5.83% और पांच या उससे अधिक वर्ष की सेवा वाले कर्मचारियों के लिए 8.33% योगदान नियोक्ता द्वारा दिया जाता है।

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