UAE में लेबर नियमों का पालन हुआ सख्त, प्राइवेट कंपनियों के मामलों में आई 15 फीसदी की बड़ी गिरावट.

Nura Basta9 September 20263 min read33 viewsUAE
UAE में लेबर नियमों का पालन हुआ सख्त, प्राइवेट कंपनियों के मामलों में आई 15 फीसदी की बड़ी गिरावट.

संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE में काम करने वाले लाखों प्रवासियों के लिए एक बहुत बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। यहाँ की सरकार ने लेबर मार्केट को और ज्यादा बेहतर और सुरक्षित बनाने के लिए जो कड़े कदम उठाए थे, उनका असर अब साफ तौर पर दिखने लगा है। यूएई के Ministry of Human Resources and Emiratisation (MoHRE) ने यह आधिकारिक घोषणा की है कि साल 2026 के पहले छह महीनों में प्राइवेट सेक्टर की कंपनियों द्वारा लेबर कानूनों के उल्लंघन के मामलों में 15 प्रतिशत की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। यह आंकड़ा पिछले साल यानी 2025 की इसी अवधि के मुकाबले काफी कम हुआ है, जिससे वहाँ काम कर रहे कामगारों और भारतीय प्रवासियों में भी काफी संतोष देखा जा रहा है।

अधिकारियों ने की लाखों साइट विजिट

लेबर कानूनों का सही से पालन हो रहा है या नहीं, यह देखने के लिए मंत्रालय की टीमों ने देश भर में लगातार काम किया। MoHRE के निरीक्षण दलों ने इस छह महीने की अवधि के दौरान कुल मिलाकर लगभग 212,000 बार फील्ड विजिट यानी साइट निरीक्षण किए। इन छापों और दौरों का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि कोई भी कंपनी अपने कर्मचारियों के अधिकारों का हनन न करे और सभी नियमों का पूरी सख्ती से पालन करे। मंत्रालय द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक, इस दौरान पब्लिक प्रॉसिक्यूशन यानी सरकारी अभियोजन पक्ष को भेजे जाने वाले मामलों में भारी कमी आई है। साल 2025 के पहले छह महीनों में ऐसे मामलों की संख्या 962 थी, जो साल 2026 के इसी समय में घटकर केवल 490 रह गई है। इस तरह इन गंभीर मामलों में सीधे तौर पर 49 प्रतिशत की भारी गिरावट देखने को मिली है।

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किन नियमों का होता था सबसे ज्यादा उल्लंघन

मंत्रालय की जांच में यह बात सामने आई कि प्राइवेट सेक्टर की कंपनियों द्वारा मुख्य तौर पर कुछ खास तरह के नियम तोड़े जा रहे थे। इनमें सबसे बड़ा उल्लंघन बिना जरूरी परमिट के श्रमिकों की भर्ती करना या उन्हें काम पर रखना शामिल है। इसके अलावा, तय समय पर Wage Protection System (WPS) के जरिए सैलरी यानी वेतन का भुगतान न करना और गलत डेटा या दस्तावेज जमा करना भी मुख्य वजहों में शामिल था। मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि कर्मचारियों की सैलरी समय पर देना और उनके पास वैध दस्तावेज होना कंपनी की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है, जिससे किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल

लेबर मामलों में आई इस बड़ी गिरावट के पीछे सरकार की आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल मुख्य वजह रही है। MoHRE के अधिकारियों ने बताया कि उन्होंने हाल ही में बहुत ही एडवांस मॉनिटरिंग टूल्स तैनात किए हैं। इन स्मार्ट सिस्टम्स में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI, डेटा एनालिटिक्स और रिस्क इंडिकेटर्स का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे निरीक्षण करने की सटीकता कई गुना बढ़ गई है। इन आधुनिक तकनीकी प्रणालियों की मदद से अधिकारी आसानी से उन कंपनियों की पहचान कर लेते हैं जो ज्यादा जोखिम वाली होती हैं और वहां तुरंत जांच की जाती है। इससे देश के लेबर बाजार की कार्यप्रणाली में सुधार हुआ है और नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों पर लगाम लगी है।

प्रवासियों और कंपनियों के लिए जरूरी निर्देश

इस पूरी स्थिति पर अधिक जानकारी के लिए आप WAM News की आधिकारिक रिपोर्ट देख सकते हैं। मंत्रालय ने सभी नियोक्ताओं यानी मालिकों को एक बार फिर चेतावनी दी है कि वे किसी भी कर्मचारी को नौकरी पर रखने से पहले सभी जरूरी परमिट जरूर हासिल करें। इसके अलावा, कर्मचारियों की सैलरी से जुड़े सभी नियमों का पालन तय समय सीमा के भीतर करना अनिवार्य है। ऐसा करने से न सिर्फ यूएई के लेबर मार्केट में स्थिरता बनी रहेगी बल्कि पूरी दुनिया में देश की अर्थव्यवस्था और प्रतिस्पर्धा की स्थिति भी मजबूत होगी। यूएई में रहने वाले भारतीय कामगारों के लिए भी यह नियम बेहद फायदेमंद साबित हो रहे हैं क्योंकि इससे उन्हें समय पर वेतन मिलने की गारंटी मिलती है और उनके अधिकारों की पूरी सुरक्षा होती है।

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