ना ना कहते UAE और Qatar अरबों रुपये Iran को देने को हुए राजी, युद्ध नुक़सान की होगी भरपाई

Lov Singh4 August 20264 min read153 viewsUAE
ना ना कहते UAE और Qatar अरबों रुपये Iran को देने को हुए राजी, युद्ध नुक़सान की होगी भरपाई

खाड़ी क्षेत्र में जारी तनाव के बीच अब बड़ी कूटनीतिक हलचल देखने को मिल रही है। अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता के केंद्र में इस वक्त एक ही सवाल है — ईरान का वह अरबों डॉलर का जमा पैसा, जो दुनियाभर के बैंकों में अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते वर्षों से जब्त पड़ा है। ताज़ा घटनाक्रम में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और कतर दोनों ही इस भारी-भरकम रकम का बड़ा हिस्सा ईरान को सौंपने के लिए आगे आते दिख रहे हैं, जबकि अमेरिका खुद अपनी तरफ से एक भी पैसा तुरंत देने को तैयार नहीं है।

क्या है पूरा मामला

ईरान के मुख्य वार्ताकार अली बाघेर कालीबाफ के सलाहकार मोहम्मद मोहम्मदी के हवाले से आई रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिका ने साफ कर दिया है कि परमाणु समझौते के तहत वह ईरान को शुरुआत में सीधे कोई राशि नहीं देगा। इसके बजाय खाड़ी के सहयोगी देशों — यूएई, कतर और सऊदी अरब — को आगे कर दिया गया है, जो समझौता पूरा होते ही पहली किस्त के तौर पर करीब 24 अरब डॉलर ईरान को उपलब्ध कराएंगे।

रिपोर्टों के अनुसार यूएई करीब 10 अरब डॉलर देने की तैयारी में है, जबकि कतर उन 6 अरब डॉलर को जारी करने पर सहमत हुआ है जो 2023 में अमेरिका ने दक्षिण कोरिया से कतर को ट्रांसफर करवाए थे और वाशिंगटन के अनुरोध पर दोहा ने उन्हें फ्रीज कर रखा था। रॉयटर्स के कुछ सूत्रों ने तो यूएई की ओर से 20 अरब डॉलर तक की राशि की भी बात कही है, हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है।

दुनियाभर में जमा है ईरान का 120 अरब डॉलर

अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों के चलते ईरान के करीब 120 अरब डॉलर की रकम दुनिया के अलग-अलग देशों — अमेरिका, ब्रिटेन, तुर्की, कतर, चीन, भारत, जापान, दक्षिण कोरिया, लक्जमबर्ग और इराक — के बैंक खातों में जमा पड़ी है। इसके अलावा करीब 20 अरब डॉलर का ईरानी तेल राजस्व अकेले चीन में फ्रीज है। यह रकम ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकने के मकसद से वर्षों पहले जब्त की गई थी।

ईरानी वार्ताकारों ने बातचीत में साफ कह दिया है कि जब तक तय की गई रकम खातों में जमा नहीं होती, तब तक कोई समझौता संभव नहीं है। ईरान समर्थक मीडिया ने इस मुद्दे को वार्ता में "आखिरी बड़ा विवाद" करार दिया है। ईरानी पक्ष की मांग है कि 12 अरब डॉलर तुरंत और बाकी 12 अरब डॉलर अगले 60 दिनों के भीतर दिए जाएं।

यूएई पर हमलों के बाद बदला रुख

गौरतलब है कि हाल के महीनों में ईरान ने यूएई पर सीधे हमले भी किए थे। रिपोर्टों के मुताबिक अबू धाबी और दुबई पर करीब 2,265 ड्रोन, 551 बैलिस्टिक मिसाइल और 29 क्रूज मिसाइल दागी गई थीं, जिनमें 13 लोगों की मौत हुई और 230 से ज्यादा घायल हुए। इसके बाद खबरें आईं कि यूएई ने ईरान को करीब 3 अरब डॉलर विमान के जरिए तेहरान पहुंचाए, जिसके बदले ईरान ने यूएई पर हमले रोक दिए और अपना सैन्य दबाव कुवैत, बहरीन और जॉर्डन की तरफ मोड़ दिया। फुजैराह बंदरगाह पर 4 मई को हुआ हमला ईरान की तरफ से यूएई पर आखिरी सीधा हमला बताया जा रहा है। रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया कि ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड के अधिकारियों ने बीते हफ्ते इसी सिलसिले में अबू धाबी का दौरा भी किया था।

हालांकि यूएई के विदेश मंत्रालय ने इन खबरों को सिरे से खारिज करते हुए एक आधिकारिक बयान में कहा कि "संयुक्त अरब अमीरात, ईरान को किसी भी तरह की रकम ट्रांसफर या कन्वर्ट किए जाने से जुड़ी रिपोर्टों को पूरी तरह खारिज करता है।" वहीं कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजिद अल अंसारी ने भी दोहा की ओर से ईरान को 12 अरब डॉलर की पेशकश किए जाने की खबरों को झूठा बताया और इसे बातचीत को पटरी से उतारने की कोशिश करार दिया।

अब भैया आगे क्या ?

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जब्त रकम को लेकर सहमति बन जाती है, तो इससे न सिर्फ ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम होगा, बल्कि होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से पूरी तरह खोलने का रास्ता भी साफ हो सकता है, जिससे क्षेत्र में आर्थिक दबाव भी घटेगा। समझौते के अगले चरण में ईरान को बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण के लिए करीब 300 अरब डॉलर की अतिरिक्त सहायता दिए जाने की भी बात चल रही है।

फिलहाल स्थिति यह है कि आधिकारिक तौर पर यूएई और कतर दोनों ही किसी सीधे भुगतान की पुष्टि से इनकार कर रहे हैं, लेकिन कूटनीतिक हलकों में चल रही खबरें और सूत्रों के हवाले से आ रही जानकारियां संकेत दे रही हैं कि पर्दे के पीछे भारी रकम के लेन-देन को लेकर बातचीत सक्रिय रूप से जारी है। अमेरिका, ईरान, कतर और यूएई — किसी ने भी अब तक इस पूरे मामले पर अंतिम और आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, ऐसे में यह मामला आने वाले दिनों में और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

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