UAE और ईरान के बीच खाड़ी के तीन द्वीपों पर नया विवाद

फारस की खाड़ी में स्थित तीन विवादित द्वीपों को लेकर संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और ईरान के बीच कूटनीतिक तनाव एक बार फिर गहरा गया है। UAE के राष्ट्रपति के राजनयिक सलाहकार, डॉ. अनवर गर्गश ने हाल ही में देश के आधिकारिक रुख को पूरी दृढ़ता के साथ दोहराया है। यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब दोनों देशों के बीच इन क्षेत्रों के मालिकाना हक को लेकर जुबानी जंग तेज हो गई है।
क्या है पूरा मामला?
यह पूरा विवाद ग्रेटर टंब, लेसर टंब और अबू मूसा नामक तीन महत्वपूर्ण द्वीपों की संप्रभुता से जुड़ा हुआ है। सितंबर के अंत में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के मंच पर UAE ने इन द्वीपों के विवाद को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने की अपील की थी। UAE के राज्य मंत्री खलीफ शाहीन अल मारार ने संयुक्त राष्ट्र में इस बात पर जोर दिया था कि इस मसले का हल या तो सीधे द्विपक्षीय वार्ताओं के जरिए निकाला जाना चाहिए या फिर इसे अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) के पास ले जाया जाना चाहिए।
UAE के इस रुख पर ईरान की तरफ से तीखी प्रतिक्रिया आई। ईरान के सर्वोच्च नेता के वरिष्ठ सलाहकार अली अकबर वेलायती ने UAE के दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि ये द्वीप हमेशा ईरानी भूभाग रहेंगे। इसके साथ ही उन्होंने UAE की राजनीतिक歷史 पर टिप्पणी करते हुए उसे क्षेत्रीय संबंधों पर ध्यान देने की सलाह दी थी।
डॉ. अनवर गर्गश का कड़ा पलटवार
ईरानी अधिकारी के बयानों का जवाब देते हुए डॉ. अनवर गर्गश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर स्पष्ट किया कि अली अकबर वेलायती का यह दावा ऐतिहासिक तथ्यों और दस्तावेजों के बिल्कुल विपरीत है। गर्गश ने जोर देकर कहा कि UAE के पास अपने दावों के समर्थन में पुख्ता ऐतिहासिक प्रमाण मौजूद हैं।
उन्होंने यह भी दोहराया कि संयुक्त अरब अमीरात अंतरराष्ट्रीय कानून के दायरे में रहते हुए इस क्षेत्रीय विवाद को जिम्मेदारी और दृढ़ संकल्प के साथ सुलझाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। कूटनीतिक गलियारों में इस बयान को UAE के कड़े रुख और अपनी संप्रभुता के प्रति उसकी अटूट प्रतिबद्धता के रूप में देखा जा रहा है।