UAE में स्कूल का नया नियम, WhatsApp पर नहीं चलेंगे बीमारी के नोट, अब भरना होगा फॉर्म.

संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के शिक्षा मंत्रालय के पाठ्यक्रम वाले स्कूलों ने छात्रों के लिए एक बहुत बड़ा बदलाव किया है। अब अभिभावक बीमार बच्चों की छुट्टी का आवेदन पत्र यानी मेडिकल सिक नोट WhatsApp या Telegram जैसे मैसेजिंग ऐप्स के जरिए नहीं भेज सकेंगे। इस पुरानी परंपरा को स्कूलों ने पूरी तरह से बंद कर दिया है और अब इसके लिए एक नया डिजिटल तरीका लाया गया है, जिससे सभी छात्र और उनके माता-पिता को राहत भी मिलेगी और नियमों का पालन भी करना होगा।
अब कैसे देना होगा मेडिकल नोट
अधिकारियों ने बताया कि अब अभिभावकों को मेडिकल छुट्टी के लिए एक नया फाइव-स्टेप इलेक्ट्रॉनिक फॉर्म भरना होगा। यह फॉर्म स्कूल द्वारा दिए गए लिंक या फिर QR code को स्कैन करके आसानी से मिल जाएगा। यह नया नियम खास तौर पर उन सभी सरकारी और निजी स्कूलों पर लागू होता है जो Ministry of Education के पाठ्यक्रम का पालन करते हैं। हालांकि, जो परिवार ब्रिटिश, अमेरिकी या भारतीय सीबीएसई स्कूलों में बच्चों को पढ़ाते हैं, वे अपने स्कूल के हिसाब से नियम देख सकते हैं, क्योंकि हर जगह का सिस्टम अलग होता है।
फॉलो करने होंगे ये 5 आसान स्टेप्स
इस नए इलेक्ट्रॉनिक फॉर्म को भरने के लिए माता-पिता को कुछ जरूरी काम करने होंगे। सबसे पहले स्कूल के दिए गए लिंक पर जाना होगा या फिर QR code स्कैन करना होगा। इसके बाद छात्र के Ministry email account से लॉगिन करना होगा। तीसरे स्टेप में छात्र का नंबर, पूरा नाम और उसकी क्लास की सही जानकारी भरनी होगी। चौथे स्टेप में डॉक्टर द्वारा दिया गया मेडिकल सर्टिफिकेट की साफ फोटो अपलोड करनी होगी और पांचवें तथा आखिरी स्टेप में फॉर्म को जमा करके सिस्टम से मिलने वाला कन्फर्मेशन संभाल कर रखना होगा।
क्यों बदला गया पूरा सिस्टम
स्कूल प्रशासन का कहना है कि यह बदलाव इसलिए जरूरी था ताकि बच्चों का रिकॉर्ड अलग-अलग जगहों पर बिखर न जाए और मेडिकल सर्टिफिकेट सीधे छात्र के आधिकारिक डेटा से जुड़ सके। डिजिटल कॉपी अपलोड करने के बावजूद माता-पिता को यह सख्त सलाह दी जाती है कि वे डॉक्टर का original medical certificate अपने पास संभाल कर रखें, क्योंकि स्कूल कभी भी इसकी भौतिक जांच यानी फिजिकल वेरिफिकेशन मांग सकते हैं। साथ ही यह भी कहा गया है कि व्हाट्सएप पर केवल मौखिक जानकारी देना ठीक है, लेकिन वह अब आधिकारिक छुट्टी का सबूत नहीं माना जाएगा।