UAE का भारत में बड़ा निवेश, 25 अरब डॉलर की नई फंडिंग और व्यापार बढ़ाने का ऐलान.

भारत और यूएई के बीच आर्थिक रिश्ते लगातार मजबूत होते जा रहे हैं और हाल ही में एक बड़ी बैठक के दौरान दोनों देशों ने भविष्य के लिए कई बड़े लक्ष्य तय किए हैं। केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री Piyush Goyal ने हाल ही में नई दिल्ली में यह जानकारी दी है कि यूएई आने वाले समय में भारत में 25 billion USD का अतिरिक्त निवेश करने की तैयारी कर रहा है। दोनों देशों ने मिलकर साल 2032 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करके 200 billion USD तक पहुंचाने का एक बड़ा लक्ष्य निर्धारित किया है, जिससे खाड़ी देशों में काम कर रहे प्रवासियों और व्यापार से जुड़े लोगों के लिए भी नए अवसर पैदा होंगे।
व्यापार और निवेश का नया सफर
भारत-यूएई हाई-लेवल ज्वाइंट टास्क फोर्स ऑन इन्वेस्टमेंट्स की 14वीं बैठक के दौरान मंत्री ने बताया कि यूएई पहले ही भारत में 25 billion USD का निवेश कर चुका है और वह भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का सातवां सबसे बड़ा स्रोत बना हुआ है। दोनों देश मिलकर भारत में कुल 100 billion USD के निवेश लक्ष्य को पूरा करने की दिशा में तेजी से काम कर रहे हैं। भारत और यूएई के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता यानी CEPA को लागू हुए चार साल पूरे हो चुके हैं और इस समझौते की मदद से दोनों देशों का आपसी व्यापार बढ़कर 100 billion USD तक पहुंच चुका है। इसी सफलता को आगे बढ़ाते हुए अब इसे 2032 तक 200 billion USD तक ले जाने की योजना है।
किन क्षेत्रों में बढ़ेगा सहयोग
निवेश के इस नए दौर में यूएई कई चुनिंदा सेक्टरों में पैसे लगाने की योजना बना रहा है, जिसमें बंदरगाह यानी पोर्ट्स, जहाज निर्माण यानी शिपबिल्डिंग, अंतरिक्ष तकनीक, भारतीय स्टार्टअप और देश का शेयर बाजार शामिल हैं। मंत्री ने यह भी कहा कि जब पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था भू-राजनीतिक तनावों और अनिश्चितताओं से जूझ रही है, तब भारत दुनिया भर के निवेशकों को स्थिरता और स्पष्टता प्रदान कर रहा है। इसके अलावा, समुद्री क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए दोनों देशों ने छह अलग-अलग क्षेत्रों में वर्किंग ग्रुप बनाने का फैसला किया है, जिसमें जहाज का स्वामित्व, आधुनिक पोर्ट्स का विकास, जहाज निर्माण, मरम्मत और रखरखाव, जहाज को तोड़ना और कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग जैसे काम शामिल हैं।
बंदरगाहों का विकास और निर्यात के लक्ष्य
आने वाले एक दशक में देश की आर्थिक वृद्धि को गति देने के लिए भारत को अपनी पोर्ट क्षमता को दोगुना करना होगा, और इसमें यूएई एक बड़ा निवेशक बनकर उभर सकता है। महाराष्ट्र के वधावन प्रोजेक्ट के साथ-साथ भारत के पूर्वी और पश्चिमी तटों पर पोर्ट डेवलपमेंट के कई प्रोजेक्ट्स पर मिलकर काम किया जा रहा है। इसके अलावा निर्यात के मोर्चे पर बात करें तो भारत ने पिछले साल वस्तुओं और सेवाओं के निर्यात से 863 billion USD की कमाई की थी और इस साल इसे बढ़ाकर 1 trillion USD तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। चालू वित्त वर्ष के शुरुआती छह महीनों में यानी 21 सितंबर तक मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट में 15 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके साथ ही ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में भी रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व और यूएई से भारत के लिए एलपीजी तथा एलएनजी का आयात बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है। इस पूरी जानकारी को विस्तार से पढ़ने के लिए आप ANI News की आधिकारिक वेबसाइट पर जा सकते हैं।