ईरान की हिंसक गतिविधियों पर ब्रिटेन और 28 देशों की साझा निंदा

लंदन: ब्रिटेन ने 28 सहयोगी देशों के साथ मिलकर ईरान की शत्रुतापूर्ण गतिविधियों के खिलाफ एक औपचारिक संयुक्त बयान जारी किया है। 12 अक्टूबर 2026 को जारी इस बयान में ईरान पर दुनिया भर में हिंसक हमलों, आगजनी, तोड़-फोड़ और साइबर गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया गया है। यानी ईरान की शत्रुतापूर्ण गतिविधियों को लेकर अब पश्चिमी देशों की एकजुटता खुलकर सामने आ गई है।
इस कदम की शुरुआत ब्रिटेन में हुई एक घटना से मानी जा रही है। 27 सितंबर 2026 को RAF फेयरफोर्ड में एक घटना हुई, जिसकी जांच के बाद बताया गया कि ड्रोन से जुड़े खतरे की आशंका के चलते B-1 बमवर्षक विमानों को वहां से हटाना पड़ा। ब्रिटेन की जांच एजेंसियों के निष्कर्ष के आधार पर सरकार इस नतीजे पर पहुंची है कि यह घटना ईरान के भीतर से समन्वित थी।
प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम ने संसद में कहा कि इस घटना के पीछे इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) का हाथ होने की संभावना है। उन्होंने साफ कहा कि ब्रिटेन अपनी धरती पर ऐसे खतरों को बर्दाश्त नहीं करेगा। इसी के तहत सरकार ने दो ईरानी नागरिकों पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है। इनमें से एक रुहोल्ला बज़गांदी हैं, जो IRGC के काउंटरएस्पायोनेज ऑपरेशंस के प्रमुख बताए गए हैं। दूसरे शहरम अली रज़ा तमरज़ादेह जक्की हैं, जिन्हें ज़िंदाशती आपराधिक नेटवर्क के सहायक के रूप में पहचाना गया है।
विदेश सचिव एड मिलिबैंड ने ब्रिटेन में तैनात ईरानी राजदूत को तलब किया और इस बात पर कड़ा विरोध जताया कि ईरान आपराधिक नेटवर्क और प्रॉक्सी समूहों के जरिए अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है।
किन देशों ने दिया साथ
इस संयुक्त बयान को ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, स्पेन, नीदरलैंड्स, स्वीडन, पोलैंड को छोड़कर बाकी यूरोपीय देशों के साथ-साथ न्यूजीलैंड, नॉर्वे और अमेरिका का भी सम