ब्रिटेन में एयरबेस के पास आतंकी संदेह में 5 गिरफ्तार, ईरान से लिंक की जांच जारी

ब्रिटेन के ग्लूस्टरशायर में स्थित आरएएफ फेयरफोर्ड एयरबेस (RAF Fairford Airbase) के पास आतंकी गतिविधियों के संदेह में पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है। यह घटना रविवार, 27 सितंबर, 2026 को हुई, जब पुलिस को सुबह-सुबह तीन संदिग्ध वाहनों के बारे में सूचना मिली थी जो एयरबेस की ओर जा रहे थे। इस गिरफ्तारी से इलाके में हड़कंप मच गया और बड़े पैमाने पर सुरक्षा अभियान चलाया गया, जिससे स्थानीय निवासियों में भी चिंता का माहौल है।
पुलिस को लगभग सुबह 12:45 बजे स्थानीय समय पर सूचना मिली कि वेलफोर्ड (Whelford) इलाके में संदिग्ध वाहन एयरबेस की ओर बढ़ रहे हैं। यह एयरबेस यूके के स्वामित्व वाला है, लेकिन इसका संचालन संयुक्त राज्य अमेरिका वायु सेना (United States Air Force) द्वारा किया जाता है। सूचना मिलते ही, पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए पांच व्यक्तियों को हिरासत में ले लिया। उन्हें शुरुआत में विस्फोटक अधिनियम (Explosives Act) के तहत गिरफ्तार किया गया था। बाद में, जांच आगे बढ़ने पर उन पर आतंकवादी कृत्य की तैयारी करने का संदेह भी लगाया गया और इसी आरोप में उन्हें दोबारा गिरफ्तार किया गया। रविवार तक, सभी पांचों संदिग्ध पुलिस हिरासत में बने हुए थे और उनसे लगातार पूछताछ की जा रही थी ताकि मामले की तह तक पहुंचा जा सके।
इस पूरे मामले की जांच काउंटर टेररिज्म पुलिसिंग (Counter Terrorism Policing) द्वारा की जा रही है, जिसका नेतृत्व लंदन की मेट्रोपॉलिटन पुलिस (Metropolitan Police) कर रही है। ग्लूस्टरशायर कांस्टेबुलरी के असिस्टेंट चीफ कॉन्स्टेबल रिचर्ड ओकोने (Richard Ocone) ने ऑपरेशन के शुरुआती विवरण की पुष्टि की। डिप्टी असिस्टेंट कमिश्नर विकी इवांस (Vicki Evans) ने स्पष्ट किया कि जांच अभी शुरुआती चरणों में है और यह ऑपरेशन किसी पूर्व खुफिया जानकारी पर आधारित नहीं था। इसका मतलब है कि अधिकारियों को किसी आसन्न साजिश की कोई अग्रिम चेतावनी नहीं मिली थी और यह कार्रवाई मौके पर मिली सूचना के आधार पर की गई।
संदिग्ध वाहनों की खोज के बाद, अधिकारियों ने तुरंत एक बड़ी घटना (major incident) घोषित की। सुरक्षा के मद्देनजर, वेलफोर्ड में लगभग 85 घरों को एहतियातन खाली कराया गया ताकि किसी भी संभावित खतरे से बचा जा सके। इलाके में 400 मीटर का घेराव (cordon) स्थापित किया गया और ब्रिटिश सेना की एक्सप्लोसिव ऑर्डनेंस डिस्पोजल (ईओडी) टीम - Explosive Ordnance Disposal (EOD) team को मौके पर बुलाया गया। ईओडी टीम ने वाहनों और मौके से जब्त की गई सामग्री की बारीकी से जांच की ताकि उनके संभावित खतरे का निर्धारण किया जा सके। इलाके में अभी भी सशस्त्र पुलिस बल और सड़क पर बैरिकेड मौजूद हैं, जिससे सुरक्षा का माहौल बना हुआ है।
इस घटना के बाद, आरएएफ फेयरफोर्ड एयरबेस पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है और उसकी परिधि की सुरक्षा को मजबूत किया गया है। वहीं, एक अन्य महत्वपूर्ण अमेरिकी वायु सेना बेस आरएएफ लकेनहीथ (RAF Lakenheath) को "चार्ली अलर्ट" ("Charlie alert") पर रखा गया है, जो अमेरिकी रक्षा विभाग द्वारा नामित दूसरा सबसे उच्चतम खतरे का स्तर है। यह दिखाता है कि इस घटना को कितनी गंभीरता से लिया जा रहा है और संभावित खतरों के प्रति व्यापक सतर्कता बरती जा रही है, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव का माहौल है।
ब्रिटेन का राजनीतिक नेतृत्व भी इस स्थिति पर कड़ी नजर रखे हुए है। यूके के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम (Andy Burnham) को नियमित रूप से अपडेट मिल रहे थे, जबकि रक्षा सचिव वेस स्ट्रीटलिंग (Wes Streeting) ने आपातकालीन सेवाओं की त्वरित और प्रभावी प्रतिक्रिया की सराहना की। इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने एक बयान में आरोप लगाया कि संदिग्ध 'काफी बड़ा नुकसान' पहुंचाने की योजना बना रहे थे और अधिकारी लंबे समय से उनकी निगरानी कर रहे थे, हालांकि इस दावे की पुष्टि अभी होनी बाकी है।
जांच अभी भी जारी है, और सुरक्षा अधिकारी ईरान से संभावित लिंक की भी जांच कर रहे हैं। यह संदेह इसलिए और गहरा जाता है क्योंकि आरएएफ फेयरफोर्ड एयरबेस का हाल ही में होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जहाजों पर हमला करने के आरोपी ईरानी मिसाइल स्थलों के खिलाफ हवाई हमलों के लिए उपयोग किया गया था। इसके अतिरिक्त, जुलाई में, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (Islamic Revolutionary Guard Corps) ने खुले तौर पर घोषणा की थी कि ईरानी क्षेत्र के खिलाफ आक्रामकता में किसी भी सैन्य अड्डे का उपयोग किया गया, तो उसे वैध लक्ष्य माना जाएगा। यह बयान मौजूदा जांच को एक और आयाम देता है और संभावित भू-राजनीतिक संबंधों की ओर इशारा करता है।