यूके का बड़ा कदम, अवैध इजरायली बस्तियों के उत्पादों पर प्रतिबंध को पूर्वी यरुशलम और गाजा तक बढ़ाने की मांग.

संयुक्त राष्ट्र की विशेष रैपोर्टेउर Francesca Albanese ने यूनाइटेड किंगडम द्वारा अवैध इजरायली बस्तियों से आने वाले सामानों पर लगाए गए नए प्रतिबंध को एक बेहद महत्वपूर्ण विकास बताया है। उन्होंने ब्रिटिश सरकार से मांग की है कि इस नीति के दायरे को और अधिक व्यापक बनाया जाए ताकि इसमें कब्जे वाले East Jerusalem और Gaza को भी शामिल किया जा सके। ब्रिटेन के विदेश सचिव Ed Miliband ने मंगलवार, 8 सितंबर 2026 को इस बात की घोषणा की थी कि ब्रिटिश सरकार वेस्ट बैंक की अवैध बस्तियों से आने वाले उत्पादों पर औपचारिक प्रतिबंध लगा रही है। यह पूरा कदम साल 2024 के अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय के उस सलाहकार फैसले से जुड़ा हुआ है, जिसमें इजरायल के कब्जे को पूरी तरह से गैरकानूनी करार दिया गया था।
ब्रिटिश सरकार की नई नीति और प्रतिबंधों का दायरा
प्रधानमंत्री Andy Burnham के प्रशासन के तहत विदेश सचिव Ed Miliband ने यह स्पष्ट किया कि इन प्रतिबंधों का मुख्य निशाना वे कंपनियां और संस्थाएं हैं जो बस्तियों के विस्तार में मदद करती हैं। इनमें निर्माण, बुनियादी ढांचे, वित्तपोषण और रियल एस्टेट जैसी सेवाएं देने वाली इकाइयां शामिल हैं। इसके साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि ब्रिटेन अब आधिकारिक तौर पर वेस्ट बैंक के कब्जे को गैरकानूनी मानता है। इस नई नीति में हथियारों पर लगने वाले प्रतिबंध को भी कड़ा किया गया है ताकि उन वस्तुओं को रोका जा सके जो इस कब्जे में सहायता करती हैं। आयात पर रोक लगाने से जुड़े इन नियमों को लागू करने के लिए कानून को अगले 6 से 9 महीनों के भीतर अंतिम रूप दिए जाने की उम्मीद है।
फ्रांसेस्का अल्बानीस की प्रतिक्रिया और अन्य अंतरराष्ट्रीय सुझाव
अल्बानीस ने ब्रिटिश रुख में आए इस बदलाव का स्वागत किया और इसे वर्षों के ब्रिटिश सहयोग को समाप्त करने की दिशा में एक बहुत जरूरी शुरुआत बताया। हालांकि उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि सरकार सचमुच में कोई बड़ा बदलाव लाना चाहती है, तो उसे केवल कृषि उत्पादों और सौंदर्य प्रसाधनों तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए। उनकी प्रमुख सिफारिशों में ब्रिटिश खुफिया सहयोग को निलंबित करना, हथियारों के लाइसेंस देने की प्रक्रिया को पूरी तरह रोकना और साइप्रस में स्थित RAF Akrotiri से आने वाली अनवेक्षित उड़नों की जांच करना शामिल है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि E1 settlement tender से निपटने की बहुत आवश्यकता है, जो पूर्वी यरुशलम को वेस्ट बैंक से अलग करने की धमकी देता है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली-जुली प्रतिक्रिया
नीति में हुए इस बदलाव पर दुनिया भर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। डेनमार्क, फिनलैंड, आइसलैंड, पोलैंड, पुर्तगाल और स्वीडन जैसे देशों ने इस फैसले का समर्थन करने का वादा किया है, जबकि नीदरलैंड, आयरलैंड, बेल्जियम, स्पेन और नॉर्वे जैसे अन्य देश भी इसी तरह के प्रतिबंध लगाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। दूसरी ओर, इस पहल का तीखा विरोध भी हो रहा है। अमेरिका के राजदूत Mike Huckabee ने इस कदम की आलोचना की है और इजरायल के वित्त मंत्री Bezalel Smotrich ने पहले ही यह बयान दिया था कि E1 settlement का उद्देश्य फिलिस्तीनी राष्ट्र के विचार को पूरी तरह से खत्म करना है। अल्बानीस ने चेतावनी दी है कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करते हुए जब ब्रिटेन इन उपायों को लागू करेगा, तो उसे इजरायली सरकार और अमेरिका दोनों की तरफ से भारी दबाव का सामना करना पड़ सकता है।