Saudi पर हूती का हमला, ब्रिटेन ने की कड़ी निंदा, कहा क्षेत्रीय शांति और नेविगेशन को है बड़ा खतरा.

यमन में संघर्ष दोबारा शुरू होने और सऊदी अरब पर लगातार हो रहे हमलों के बाद दुनिया भर के देशों की प्रतिक्रिया सामने आने लगी है। इसी कड़ी में 10 सितंबर 2026 को यूनाइटेड किंगडम के विदेश, राष्ट्रमंडल और विकास कार्यालय यानी FCDO ने हूती विद्रोहियों के खिलाफ एक सख्त बयान जारी किया है। ब्रिटिश सरकार ने इन हमलों की कड़ी निंदा करते हुए कहा है कि नागरिक ठिकानों और ऊर्जा के बुनियादी ढांचों को निशाना बनाने की पूरी जिम्मेदारी हूतियों की ही है। इस तरह की हरकतों से न केवल मानवीय संकट गहराता जा रहा है, बल्कि पूरे क्षेत्र की शांति के साथ-साथ लाल सागर और बाब अल-मदब में जहाजों की आवाजाही की स्वतंत्रता भी खतरे में पड़ गई है।
मखा बंदरगाह पर कब्जा और हमलों का सिलसिला
खुफिया रिपोर्टों से यह बात सामने आई है कि हूती विद्रोही यमन के रणनीतिक बंदरगाह शहर मखा में प्रवेश कर चुके हैं, जिससे व्यापारिक मार्गों पर एक बड़ा खतरा मंडराने लगा है। यह तनावपूर्ण स्थिति 9 सितंबर और 10 सितंबर 2026 को हुए बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमलों के बाद और अधिक गंभीर हो गई है। इन हमलों में सऊदी अरब के दक्षिणी शहरों जैसे Abha, Khamis Mushait और Jazan को निशाना बनाया गया था। इन हमलों की चपेट में आने से कम से कम 73 आम नागरिक घायल हो गए। इन सभी घटनाओं की विस्तृत जानकारी आप UK Government Official Statement पर देख सकते हैं।
सऊदी अरब और यमन की जवाबी कार्रवाई
हूतियों के इन हमलों का जवाब देते हुए सऊदी के नेतृत्व वाले गठबंधन ने भी सख्त रुख अपनाया है। हूती समर्थित समाचार एजेंसी सबा की रिपोर्ट के मुताबिक, इन घुसपैठियों के जवाब में लगभग 40 सऊदी-समर्थित हवाई हमले किए गए। इन हवाई हमलों में ताएज़, होदेडा, अल-जौफ़ और मारिब जैसे गवर्नरेट को निशाना बनाया गया। ब्रिटेन ने अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत यह स्पष्ट रूप से दोहराया है कि सऊदी अरब और यमन गणराज्य दोनों को अपनी संप्रभुता की रक्षा करने का पूरा अधिकार है। इस बारे में अधिक जानकारी UN Security Council UK Statement के माध्यम से प्राप्त की जा सकती है।
जुलाई 2026 से लगातार बढ़ रहा है तनाव
ब्रिटिश सरकार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, हूतियों की तरफ से आक्रामकता का यह दौर जुलाई 2026 से ही लगातार देखा जा रहा है। इस दौरान इस गुट ने लगातार तेल और गैस के बुनियादी ढांचों को अपना निशाना बनाया है और लाल सागर से होने वाले ऊर्जा निर्यात पर रोक लगाने की कोशिश की है। ब्रिटिश सरकार ने हूतियों से तुरंत इस तरह के हमलों को रोकने की अपील की है और साथ ही पहले भी ईरान से यह आग्रह किया था कि वह इस गुट को अपना समर्थन देना पूरी तरह बंद करे। इस पूरे घटनाक्रम और इसके प्रभावों की समीक्षा आप ReliefWeb Yemen Report में पढ़ सकते हैं।