UK सख्त, वेस्ट बैंक बस्तियों पर नए प्रतिबंधों का ऐलान, अक्टूबर चुनाव से पहले बढ़ा तनाव

ब्रिटेन ने वेस्ट बैंक में अवैध बस्तियों पर अपना दबाव काफी ज्यादा बढ़ा दिया है और ब्रिटिश यहूदी प्रवासियों को साफ चेतावनी दी है कि उन्हें नए प्रतिबंधों का सामना करना पड़ेगा। इस नई नीति का मकसद केवल चुनिंदा लोगों को निशाना बनाने के बजाय पूरे बस्ती वाले कारोबार पर शिकंजा कसना है। यह कदम 8 सितंबर 2026 को ब्रिटिश विदेश सचिव Ed Miliband की एक घोषणा के बाद उठाया गया है, जिसमें उन्होंने इस इजरायली कब्जे को गैरकानूनी बताया था। ब्रिटेन के इस नए नियम में बस्तियों से आने वाले सामानों पर आयात प्रतिबंध और वित्तपोषण, रियल एस्टेट से जुड़ी सेवाओं पर रोक शामिल है जिसे अगले छह से नौ महीनों में पूरी तरह लागू किया जाना तय किया गया है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ा विरोध और यूरोपीय देशों का साथ
लंदन के इस कदम से दुनिया के कई अन्य देश भी जुड़ गए हैं। फ्रांस, कनाडा, डेनमार्क, फिनलैंड, आइसलैंड, आयरलैंड, नार्वे, पुर्तगाल, स्पेन और स्वीडन ने भी बस्तियों के व्यापार पर रोक लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख Kaja Kallas ने 15 सितंबर 2026 को इस बात की पुष्टि की थी कि यूरोपीय संघ अवैध बस्तियों के फैलाव और लोगों को जबरन हटाने जैसी वजहों से नए प्रतिबंधों पर चर्चा कर रहा है। इसके अलावा स्कॉटलैंड की एक चर्च से जुड़ी एजेंसी ने भी अवैध बस्तियों के साथ पूरे व्यापार के बहिष्कार की मांग को लेकर अभियान शुरू कर दिया है।
इजराइल सरकार की प्रतिक्रिया और आगामी चुनाव
इन अंतरराष्ट्रीय फैसलों के जवाब में प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu की सरकार ने यरुशलम में स्थित ब्रिटिश कंसुलट को बंद करने का आदेश दिया है और ब्रिटेन के 15 सांसदों पर देश में आने पर रोक लगा दी है। इसके बावजूद विश्लेषकों का मानना है कि इन प्रतिबंधों का असर आगामी 27 अक्टूबर 2026 को होने वाले इजरायली चुनावों पर मतदाताओं की सोच पर अभी तक नहीं पड़ा है। कुछ जानकारों का यह भी कहना है कि इन पाबंदियों की वजह से देश में दक्षिणपंथी विचारधारा वाले लोगों का समर्थन और मजबूत हो सकता है क्योंकि इससे लोगों में अकेलापन महसूस होने की भावना बढ़ रही है।
कानूनी विशेषज्ञों की मांग और अंतरराष्ट्रीय अदालत का फैसला
ब्रिटेन के भीतर भी सरकार पर दबाव लगातार बनता जा रहा है और 16 सितंबर 2026 को 130 से अधिक कानूनी विशेषज्ञों ने प्रधानमंत्री Andy Burnham को एक औपचारिक पत्र लिखा। इन जानकारों का कहना था कि मौजूदा नियम अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत ब्रिटेन की जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए नाकाफी हैं इसलिए नियमों को और ज्यादा कड़ा किया जाना चाहिए। यह पूरा कूटबारी बदलाव मुख्य रूप से जुलाई 2024 के उस अंतरराष्ट्रीय अदालत के फैसले पर टिका है जिसमें यह तय किया गया था कि फलस्तीनी क्षेत्रों में इजराइल की मौजूदगी गैरकानूनी है और इसे अब खत्म किया जाना बेहद जरूरी है।