RAF Fairford Iran मामला: PM बर्नहैम ने IRGC पर लगाया तालमेल का आरोप

Gautam Sahu12 October 20262 min read0 viewsWorld
RAF Fairford Iran मामला: PM बर्नहैम ने IRGC पर लगाया तालमेल का आरोप

लंदन: ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम ने 12 अक्टूबर 2026 को संसद में बयान देते हुए कहा कि RAF Fairford और RAF Molesworth में हाल में हुई सुरक्षा घटनाओं के पीछे ईरान के तालमेल की काफी संभावना है। उनके मुताबिक इन घटनाओं को लगभग निश्चित रूप से इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के निर्देश पर अंजाम दिया गया।

प्रधानमंत्री ने इसके जवाब में तेहरान पर और प्रतिबंध लगाने और आपराधिक नेटवर्क व उनकी फंडिंग के रास्तों पर बड़ी कार्रवाई करने की बात कही। सरकार की ओर से जारी जानकारी के अनुसार विदेश सचिव एड मिलिबैंड ने ईरानी राजदूत को तलब कर इस तरह की गतिविधियों पर कड़ा विरोध जताया है।

मामले की शुरुआत 27 सितंबर 2026 को हुई, जब RAF Fairford के पास पांच ब्रिटिश नागरिकों को आतंकवाद और विस्फोटक से जुड़े अपराधों के शक में गिरफ्तार किया गया था। पुलिस को उनकी वैन में पेट्रोल मिला, लेकिन कोई विस्फोटक नहीं मिला। बाद में इन लोगों को जमानत पर छोड़ दिया गया।

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इसके अलावा 8 अक्टूबर 2026 को RAF Molesworth में अतिक्रमण के आरोप में दो लातवियाई नागरिकों को पकड़ा गया था। हालांकि काउंटर-टेरर पुलिस का कहना है कि अभी तक इस घटना और Fairford मामले के बीच कोई सबूत नहीं मिला है।

अमेरिका और यूरोप तक फैला मामला

इस पूरे विवाद की गूंज अमेरिका तक भी सुनाई दी है। राष्ट्रपति Donald Trump पहले कह चुके हैं कि ईरान से जुड़े एक खतरे की वजह से RAF Fairford से अमेरिकी B-1 बमवर्षक हटाने पड़े थे। यानी इस अड्डे की सुरक्षा का मुद्दा पहले से ही संवेदनशील बना हुआ है।

ब्रिटेन ने यूरोप और अमेरिका में जासूसी के आरोपी दो ईरानी नागरिकों पर भी प्रतिबंध लगाए हैं। साथ ही UK उन 20 से ज़्यादा देशों के साझा बयान में शामिल हुआ है, जिसमें ईरान की ओर से की जा रही घातक साजिशों, आगजनी, तोड़फोड़ और साइबर हमलों की निंदा की गई है।

गृह सचिव शबाना महमूद ने कहा है कि अधिकारियों का मानना है कि Fairford की साजिश के पीछे ईरान में बैठा एक खास व्यक्ति था। हालांकि इस दावे को अदालत या सार्वजनिक सबूत के रूप में अभी पेश नहीं किया गया है।

उधर ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने किसी भी तरह की संलिप्तता से इनकार करते हुए ब्रिटेन से अपने दावों के समर्थन में ठोस सबूत पेश करने की मांग की है।

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