UK का कड़ा फैसला, वेस्ट बैंक में इस्राइली बस्तियों के खिलाफ जल्द उठाए जाएंगे कड़े कदम

ब्रिटेन की सरकार ने कब्जे वाले वेस्ट बैंक में इस्राइली बस्तियों की गतिविधियों को रोकने के लिए एक बड़ा कदम उठाने का ऐलान किया है। UK Foreign Secretary Ed Miliband ने 1 सितंबर 2026 को संसद में जानकारी दी कि आने वाले कुछ हफ्तों में ब्रिटेन इस मामले में सख्त उपायों का एक पूरा पैकेज लेकर आएगा। सरकार का यह साफ मानना है कि इस्राइल की ई-वन (E1) बस्ती परियोजना फलस्तीनी राज्य बनने की उम्मीदों को पूरी तरह खत्म कर रही है, और ब्रिटेन इस समाधान को बर्बाद होते नहीं देख सकता है।
कूटनीतिक तनाव और तनातनी की शुरुआत
यह पूरा विवाद 19 अगस्त 2026 को तब शुरू हुआ जब एड मिलिबैंड ने इस्राइल द्वारा ई-वन प्रोजेक्ट के लिए टेंडर जारी करने के फैसले की कड़ी आलोचना की थी। इसके बाद उन्होंने इस्राइली विदेश मंत्री Gideon Sa'ar से इन योजनाओं को तुरंत रोकने और टेंडर वापस लेने की मांग की थी। ब्रिटेन के विदेश, राष्ट्रमंडल और विकास कार्यालय में इस्राइली चार्ज डी'affaires को तलब किया गया था, जहां उन्हें ब्रिटेन की तरफ से आधिकारिक तौर पर इस बात पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई गई थी। इसके ठीक अगले दिन यानी 20 अगस्त 2026 को ब्रिटेन ने फ्रांस, जर्मनी, इटली, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया के साथ मिलकर इन निर्माण टेंडरों के खिलाफ एक संयुक्त बयान जारी किया था। इस बारे में अधिक जानकारी आधिकारिक UK Government News पोर्टल पर देखी जा सकती है।
प्रतिबंधों और व्यापारिक प्रतिबंधों की तैयारी
ब्रिटिश सरकार की तरफ से आने वाले इन नए उपायों में उन संस्थाओं और लोगों पर प्रतिबंध लगाना शामिल हो सकता है जो बस्तियों के विस्तार में शामिल हैं। इसके अलावा अवैध बस्तियों में पैदा होने वाले सामान के व्यापार पर भी रोक लगाई जा सकती है। हालांकि प्रधानमंत्री Andy Burnham ने पद संभालने से पहले ही व्यापार पर रोक लगाने की इच्छा जताई थी, लेकिन इस योजना को लेकर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। लेबर मुस्लिम नेटवर्क, इंटरनेशनल सेंटर ऑफ जस्टिस फॉर फिलिस्तीनी और मुस्लिम काउंसिल ऑफ ब्रिटेन ने इस पर जल्द से जल्द कार्रवाई करने की मांग की है। वहीं ह्यूमन राइट्स वॉच का कहना है कि ऐसे कदमों से उन गतिविधियों से होने वाले मुनाफे को कम किया जा सकता है जिन्हें युद्ध अपराध माना जाता है।
विभिन्न संगठनों और नेताओं की प्रतिक्रियाएं
इस बीच लेबर फ्रेंड्स ऑफ इस्राइल ने चेतावनी दी है कि व्यापार पर इस तरह की व्यापक रोक लगाने से इस्राइल का अघोषित बहिष्कार जैसा माहौल बन सकता है। ब्रिटेन में प्रोग्रेसिव जुडिय़ाज्म के नेताओं, रब्बी जोश लेवी और रब्बी चार्ली बैगिंस्की ने सरकार को अगले कदम उठाने से पहले बहुत सोच-समझकर फैसला लेने की अपील की है। वर्तमान में नेतन्याहू सरकार की नीतियों को लेकर ब्रिटिश प्रशासन लगातार आलोचनाओं का सामना कर रहा है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ब्रिटेन के रुख के बारे में विस्तार से UN Security Council Statement पर पढ़ा जा सकता है। संयुक्त बयान से जुड़ी अन्य बातें Joint Statement Portal पर भी उपलब्ध हैं।