जेनेवा में यूकेपीएनपी का पाकिस्तान के खिलाफ प्रदर्शन, पीओजेके में मानवाधिकार हनन का उठाया मुद्दा.

स्विट्जरलैंड के जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के बाहर यूनाइटेड कश्मीर पीपुल्स नेशनल पार्टी यानी UKPNP ने पाकिस्तान के खिलाफ एक बड़ा प्रदर्शन किया। यह विरोध प्रदर्शन संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 63वें सत्र के दौरान किया गया, जिसमें पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू और कश्मीर यानी PoJK में हो रहे मानवाधिकारों के हनन और स्थानीय लोगों पर जुल्मों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाया गया। इस प्रदर्शन में शामिल लोगों ने पाकिस्तान के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और वहां की सरकार पर गंभीर आरोप लगाए।
शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी का मामला
इस विरोध प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा पिछले साल 5 जून को पीओजेके में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर हुई गोलीबारी का मामला रहा। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने शांतिपूर्ण तरीके से विरोध कर रहे लोगों पर गोलियां चलाई थीं, जिसमें कई आम नागरिक मारे गए थे और दर्जनों लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे। प्रदर्शनकारियों ने इस घटना की निष्पक्ष जांच कराने और आम नागरिकों पर बल प्रयोग करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग उठाई। इसके अलावा, UKPNP ने इस क्षेत्र में आतंकवाद को बढ़ावा देने और PoJK को आतंकवाद के अड्डे के रूप में इस्तेमाल किए जाने पर भी गहरी चिंता व्यक्त की।
यूकेपीएनपी अध्यक्ष सरदार शौकत अली कश्मीरी का बयान
ANI से बातचीत करते हुए UKPNP के अध्यक्ष सरदार शौकत अली कश्मीरी ने पाकिस्तानी सुरक्षा बलों पर गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन और पीओजेके में विरोध प्रदर्शनों को बेरहमी से कुचलने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोग अपने बुनियादी अधिकारों और निष्पक्ष प्रशासन की मांग कर रहे हैं, लेकिन उन्हें राज्य की तरफ से भारी दमन का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि आज हम उन पाकिस्तानी ताकतों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं जो पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में सक्रिय हैं। लोग अपने बुनियादी अधिकारों के लिए प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन दुर्भाग्य से पाकिस्तान सरकार उनकी तुरंत की जाने वाली मांगों को मानने के लिए तैयार नहीं है।
बड़े पैमाने पर लोगों की हत्या और गिरफ्तारी के आंकड़े
UKPNP अध्यक्ष ने इस्लामाबाद पर बुनियादी अधिकारों और स्थानीय संसाधनों पर नियंत्रण की शांतिपूर्ण मांगों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया। उन्होंने चौंकाने वाले आंकड़े सामने रखते हुए बताया कि क्षेत्र में 100 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। इसके अलावा 600 से अधिक लोगों को जबरन गायब कर दिया गया है और लगभग 1,500 लोगों को हिरासत में लिया गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि वहां की न्यायपालिका पूरी तरह से समझौता कर चुकी है और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में कश्मीरी लोगों के दुखों को उठाने के लिए किसी भी अकेली आवाज को अनुमति नहीं दी जा रही है। उन्होंने क्षेत्र में आर्थिक शोषण और बुनियादी ढांचे के ढहने का जिक्र करते हुए राज्य की हिंसा को तुरंत रोकने की मांग की और पाकिस्तान से संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी के चार्टर को स्वीकार करने का आह्वान किया।