इजराइल सेना में अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स यहूदियों की भर्ती 30 प्रतिशत बढ़ी, कानूनी सख्ती का असर.

Aanya2 September 20263 min read31 viewsWorld
इजराइल सेना में अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स यहूदियों की भर्ती 30 प्रतिशत बढ़ी, कानूनी सख्ती का असर.

इजराइल की सेना यानी IDF में अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स यानी Haredi युवाओं की भर्ती में भारी तेजी देखने को मिली है। पिछले साल के मुकाबले इस साल सैन्य सेवा में शामिल होने वाले इन युवाओं की संख्या में लगभग 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सरकार की तरफ से लगातार कानूनी दबाव बनाया जा रहा है और सेना में कर्मचारियों की भारी कमी चल रही है, जिसके चलते यह बदलाव आया है। सेना के रिकॉर्ड के अनुसार, हाल ही में शुरू हुए कॉम्बैट रिक्रूटमेंट साइकिल के पहले दिन करीब 260 युवा सेना में भर्ती हुए हैं।

भर्ती के आंकड़े और नई बटालियन

सेना में शामिल होने वाले इन नए युवाओं में से 100 से ज्यादा ने Netzah Yehuda Battalion को चुना है। इसके अलावा, 30 से अधिक युवाओं ने Paratroopers Brigade में अपनी जगह बनाई है और 75 युवाओं ने विशेष रूप से इन सैनिकों के लिए बनाई गई Hasmonean Brigade को ज्वाइन किया है। रक्षा अधिकारियों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस नई ब्रिगेड में शामिल होने वाले लोगों की संख्या और भी ज्यादा बढ़ेगी। IDF Personnel Directorate के प्रमुख Maj.-Gen. Dado Bar Kalifa द्वारा तय किए गए लक्ष्यों को पूरा करने की दिशा में यह भर्ती प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। इससे पहले 30 अगस्त 2026 को तेल हाशोमर रिक्रूटमेंट सेंटर पर लगभग 500 युवा पहुंचे थे, जिनमें से 60 प्रतिशत यानी 300 युवाओं को कॉम्बैट भूमिकाओं में तैनात किया गया था।

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सेना में भारी कमी और कानूनी अड़चनें

एक तरफ जहां भर्ती बढ़ी है, वहीं दूसरी तरफ इजराइली सेना के सामने अभी भी 12,000 सैनिकों की भारी कमी बनी हुई है। आंकड़ों से पता चलता है कि 80,000 से 90,000 के करीब अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स पुरुष ऐसे हैं जो इस उम्र के हैं लेकिन उन्होंने अभी तक सेना ज्वाइन नहीं की है। जून 2024 में सुप्रीम कोर्ट के सर्वसम्मति से आए फैसले के बाद से अब तक केवल 2,100 युवा ही सेना में आए हैं। कोर्ट ने साफ कर दिया था कि येशिया (धार्मिक स्कूलों) के छात्रों को मिलने वाली छूट के लिए कोई मजबूत कानूनी आधार नहीं है। उस फैसले के बाद से अब तक 79,000 से ज्यादा समन या कंस्क्रिप्शन ऑर्डर जारी किए जा चुके हैं, लेकिन जनवरी 2025 से जनवरी 2026 के बीच केवल 17 लोगों को ही जबरन गिरफ्तार किया गया था। वर्तमान में लगभग 32,000 लोग ऐसे हैं जिन्हें ड्राफ्ट इवेडर यानी सेना से बचने वाला माना गया है और 50,000 अन्य लोगों को औपचारिक चेतावनी भेजी जा चुकी है।

जनता का विरोध और राजनीतिक हलचल

इस पूरी प्रक्रिया को लेकर समाज में तनाव का माहौल भी साफ देखा जा सकता है। कट्टरपंथी अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स प्रदर्शनकारियों ने तेल हाशोमर सुविधा केंद्र के बाहर जमकर विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने सड़कों को जाम किया और नए रंगरूटों का रास्ता रोकने की कोशिश की। प्रदर्शनकारियों के हाथों में तख्तियां थीं जिन पर लिखा था कि सेना के कैंपों में आध्यात्मिक रूप से मरने से बेहतर है कि होलोकॉस्ट के दौरान यहूदी बनकर मर जाएं। हालांकि इसके उलट कुछ ऐसे युवा भी थे जिन्होंने देश के प्रति अपनी निष्ठा और प्रतिबद्धता दिखाई। भर्ती होने वाले शमुएल कोहेन ने कहा कि देश के लिए योगदान देना उनके लिए जरूरी है, वहीं योसेफ फ्रीडमैन ने इस भर्ती को एक बड़ा विशेषाधिकार बताया है। राजनीतिक गलियारों में भी इसको लेकर चर्चा गर्म है, क्योंकि जुलाई 2026 में नेसेट में एक कानून पास किया गया था जिसका मकसद सेना से बचने वालों की गिरफ्तारी पर रोक लगाना और यहूदी धार्मिक अध्ययन को देश का बुनियादी मूल्य घोषित करना था। प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu की गठबंधन सरकार राजनीतिक स्थिरता बनाए रखने के लिए इन तमाम पहलुओं को साधने में जुटी हुई है।

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