सऊदी अरब और यमन पर हूती हमलों से संयुक्त राष्ट्र परेशान, सुरक्षा परिषद ने की कड़ी निंदा.

संयुक्त राष्ट्र ने यमन में बढ़ते हूती हमलों और सऊदी अरब पर लगातार हो रहे हमलों को लेकर गंभीर चिंता जताई है। 21 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र की तरफ से एक आधिकारिक बयान जारी किया गया जिसमें यह बात कही गई कि इन हमलों से आम लोगों को बहुत ज्यादा परेशानी हो रही है। संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता स्टेफन दुजारिक ने बताया कि यमन के कई इलाकों जैसे ताइज, लाहज और मारिब में हूती लड़ाकों की तरफ से सैन्य गतिविधियां काफी तेज कर दी गई हैं, जिससे वहां के आम नागरिकों की जिंदगी पर बुरा असर पड़ रहा है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने भी इन हमलों की निंदा करते हुए सभी पक्षों से तुरंत संयम बरतने की अपील की है ताकि अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का पालन किया जा सके।
यमन में विस्थापन और सऊदी अरब पर हमले
हूती विद्रोहियों की इन हरकतों की वजह से यमन में मानवीय संकट बहुत ज्यादा गहरा गया है। पिछले कुछ हफ्तों में यमन के भीतर करीब 130,000 लोग अपना घर छोड़ने को मजबूर हो चुके हैं। हालात इतने खराब हैं कि अकेले 18 सितंबर से 21 सितंबर के बीच ही 11,000 से ज्यादा लोग विस्थापित हुए हैं। इनमें से ज्यादातर लोग ताइज और लाहज इलाकों से हैं जहां हूती सेना ने कहबूब पर्वत जैसे जरूरी स्थानों के पास अपनी ताकत बढ़ा ली है। इसके अलावा हूती समूहों ने सऊदी अरब की राजधानी रियाद को निशाना बनाने की कोशिश की और खामिस मुशाइत में स्थित किंग खालिद एयर बेस पर ड्रोन तथा मिसाइल से बड़े पैमाने पर हमले किए। इस बारे में अधिक जानकारी आप ReliefWeb रिपोर्ट में देख सकते हैं।
अंतरराष्ट्रीय नौवहन और क्षेत्रीय सुरक्षा पर असर
जमीनी हमलों के अलावा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने लाल सागर में समुद्री सुरक्षा को लेकर भी गहरी चिंता व्यक्त की है। बाब अल-मंदाब जलडमरूमध्य के पास हूती गतिविधियों के कारण अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही खतरे में पड़ गई है। इस बीच संयुक्त राष्ट्र के यमन के लिए विशेष दूत हंस ग्रुंडबर्ग ओमान के अधिकारियों और हूती प्रतिनिधियों के साथ मस्कट में लगातार बातचीत कर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार यह कोशिश कर रहा है कि हूती आंदोलन को अवैध रूप से हथियार मिलने से रोका जाए और इस संघर्ष को फैलने से बचाया जाए। ब्रिटेन के रुख और सुरक्षा परिषद की इस बैठक से जुड़ी अन्य बातें UK सरकार के आधिकारिक बयान में पढ़ी जा सकती हैं। सुरक्षा परिषद ने यह भी साफ किया है कि सऊदी अरब को अपनी नागरिक और ऊर्जा बुनियादी ढांचे की रक्षा करने का पूरा अधिकार है और प्रस्ताव 2216 (2015) को सख्ती से लागू किया जाना चाहिए।