संयुक्त राष्ट्र ने ईरान में शादी समारोह पर हुए हमले की की कड़ी निंदा, आम नागरिकों की मौत पर जताई गहरी चिंता।

संयुक्त राष्ट्र के महासचिव Antonio Guterres ने 2 सितंबर 2026 को ईरान में नागरिकों की मौत और एक शादी समारोह पर हुए हवाई हमले को लेकर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की है। उनके प्रवक्ता Stéphane Dujarric ने मीडिया को जानकारी दी कि महासचिव अमेरिका और ईरान के बीच रात भर चली सैन्य झड़पों और गोलीबारी से काफी चिंतित हैं। यह पूरा मामला ऐसे समय में सामने आया है जब पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है और आम लोग इसकी सबसे बड़ी कीमत चुका रहे हैं।
ईरान के इस इलाके में हुआ हमला और क्या बोले अधिकारी
यह हमला 1 सितंबर 2026 की रात को ईरान के होर्मोज़गन प्रांत के सिरिक काउंटी स्थित बंदर कुहेस्तक में हुआ था। इस दर्दनाक हमले में कई बेकसूर लोगों की जान चली गई और भारी नुकसान हुआ। ईरान के स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि पूरे देश में अमेरिकी हमलों की वजह से कुल 18 लोगों की मौत हुई और 108 लोग घायल हुए। अकेले शादी समारोह वाले हादसे में 4 लोगों की जान चली गई और 67 लोग घायल हो गए। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, शादी में जान गंवाने वालों में महिलाएं और 4 से 16 साल के बच्चे भी शामिल थे।
ईरान और अमेरिका का पक्ष
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baqaei ने इस शादी पर हुए हमले को एक 'युद्ध अपराध' करार दिया है और कहा है कि इसका बहुत कड़ा जवाब दिया जाएगा। वहीं, ईरान की संसद के राष्ट्रीय सुरक्षा आयोग के प्रमुख Ebrahim Azizi ने इस घटना को मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन बताया और कहा कि इसे बख्शा नहीं जाएगा। इन सभी आरोपों के जवाब में अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के प्रवक्ता Tim Hawkins ने कहा कि अमेरिकी सेना इन सभी रिपोर्ट्स की गंभीरता से जांच कर रही है और अमेरिका कभी भी नागरिकों को निशाना नहीं बनाता है, जबकि ईरान का रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC ऐसा करता है।
हॉर्मूज जलडमरूमध्य से शुरू हुआ था विवाद
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यह पूरा सैन्य तनाव तब और बढ़ गया जब ईरानी सेना ने हॉर्मूज जलडमरूमध्य में कमर्शियल जहाजों पर हमले किए। इसके बाद अमेरिकी सेना ने जवाबी कार्रवाई की। जवाब में ईरान ने भी 2 सितंबर को जॉर्डन, इराक और कुवैत में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलें दाग दीं। संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख ने सभी प्रकार के हमलों की निंदा की है और सभी पक्षों से अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों का पालन करने की अपील की है। उन्होंने तुरंत सैन्य कार्रवाई रोकने और बातचीत के जरिए मामलों को सुलझाने पर जोर दिया है।