UN में ईरान के राष्ट्रपति पेज़ेश्कियन का कड़ा बयान, बोले- हम आतंकवादी नहीं बल्कि शिकार हैं

संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच से ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भाषण का बहुत तीखा जवाब दिया है। उन्होंने दुनिया के सामने साफ किया कि उनका देश किसी भी तरह के आतंकवाद का समर्थन नहीं करता है, बल्कि खुद लंबे समय से आतंकवाद का शिकार बनता रहा है। इस दौरान अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने उनके भाषण के समय सभागार से बाहर जाने का फैसला किया।
परमाणु कार्यक्रम और सुरक्षा पर स्पष्ट बात
ईरानी राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि उनका देश परमाणु तकनीक का इस्तेमाल केवल बिजली बनाने और अपने देश के विकास के लिए करना चाहता है। उनके मुताबिक, ईरान का इरादा कभी भी परमाणु हथियार बनाने का नहीं रहा है और न ही वे शांतिपूर्ण परमाणु तकनीक का अपना कानूनी अधिकार छोड़ेंगे। इसके अलावा उन्होंने अमेरिका और इजराइल द्वारा देश पर किए गए हमलों का जिक्र करते हुए कहा कि ईरान अपनी रक्षा करना अच्छी तरह जानता है और किसी भी तरह के बाहरी दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है।
स्कूल पर हुए हमले और बच्चों की मौत का जिक्र
पेज़ेश्कियन ने पिछले दिनों हुए एक भीषण युद्ध का हवाला दिया जिसमें ईरान के एक स्कूल को निशाना बनाया गया था। उन्होंने दावा किया कि इस खतरनाक हमले में अमेरिका और इजराइल में बने हथियारों का इस्तेमाल किया गया था, जिसमें छोटे-छोटे मासूम बच्चे मारे गए थे। संयुक्त राष्ट्र की हाल ही में आई जांच रिपोर्ट के अनुसार, फरवरी महीने में मिनाब शहर के एक प्राथमिक स्कूल पर हमला हुआ था जिसमें 150 से ज्यादा बेकसूर लोग मारे गए थे और उनमें करीब 120 बच्चे शामिल थे। हालांकि अमेरिका ने इस हमले की जिम्मेदारी लेने से साफ इनकार कर दिया था।
बातचीत और कूटनीति पर जोर
ईरानी नेता ने कहा कि उनका देश अमेरिका के साथ बातचीत और कूटनीति के रास्ते पर चलने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कोई भी बातचीत धमकी देने या सैन्य दबाव की भाषा में बिल्कुल नहीं हो सकती है। तमाम तरह के आर्थिक प्रतिबंधों और भारी दबाव के बावजूद ईरान अपना सिर नहीं झुकाएगा। होर्मुज जलडमरूमध्य का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि ईरान कभी ऐसे हालात बर्दाश्त नहीं करेगा जहां बाकी देश इस रास्ते का इस्तेमाल अपने फायदे के लिए करें और साथ ही इसी रास्ते से ईरान पर दबाव भी बनाएं।
फिलिस्तीन का मुद्दा और पश्चिम एशिया की शांति
फिलिस्तीन के संवेदनशील मुद्दे पर बात करते हुए उन्होंने इसे अंतरराष्ट्रीय समुदाय की अंतरात्मा पर एक बड़ा और खुला घाव बताया। उनका कहना था कि जब तक फिलिस्तीन के लोगों को न्याय नहीं मिलता, तब तक पश्चिम एशिया में कभी भी स्थायी शांति स्थापित नहीं हो सकती है। अंत में उन्होंने दोहराया कि ईरान ने खुद कभी कोई युद्ध शुरू नहीं किया और वह हमेशा शांतिपूर्ण बातचीत के लिए तैयार रहता है, लेकिन अपने देश की हिफाजत करने के लिए वह कभी पीछे नहीं हटेगा।