संयुक्त राष्ट्र में बोले नेपाल के पीएम, भगवान पशुपतिनाथ और बुद्ध के संदेश से होगी दुनिया की भलाई.

संयुक्त राष्ट्र की 81वीं महासभा का आयोजन इस बार बेहद खास रहा, जहां नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने अपने भाषण के दौरान दुनिया भर का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने अपने संबोधन की शुरुआत और अंत में नेपाल की प्राचीन संस्कृति, आस्था और शांति के संदेश को प्रमुखता से रखा। प्रधानमंत्री शाह ने पूरी दुनिया को शांति का पाठ पढ़ाते हुए कहा कि आज के समय में जब पूरी मानव जाति कई तरह की मुश्किलों से जूझ रही है, तब हमें अपनी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जड़ों की ओर लौटने की जरूरत है। उन्होंने वैश्विक मंच से साफ शब्दों में कहा कि भगवान पशुपतिनाथ पूरे विश्व का कल्याण करें और यह पूरी दुनिया भगवान गौतम बुद्ध द्वारा दिखाए गए मार्ग पर आगे बढ़े। उनके इस भाषण को सुनने के लिए वहां मौजूद तमाम देशों के प्रतिनिधि मौजूद रहे और नेपाल के इस शांति संदेश को बहुत ध्यान से सुना गया।
नेपाल की आध्यात्मिक पहचान और वैश्विक शांति
प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने अपने इस महत्वपूर्ण भाषण के दौरान नेपाल की दो सबसे बड़ी और पवित्र पहचानों का खुलकर जिक्र किया। उन्होंने देश की धार्मिक और सांस्कृतिक आस्था के मुख्य प्रतीक भगवान पशुपतिनाथ के साथ-साथ शांति के अग्रदूत भगवान गौतम बुद्ध को याद किया। उनका जन्मस्थान नेपाल के लुंबिनी में स्थित है, जो पूरी दुनिया में अहिंसा और शांति का बड़ा केंद्र माना जाता है। प्रधानमंत्री ने इन दोनों महान प्रतीकों के विचारों को केवल नेपाल तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे पूरी दुनिया की भलाई और आपसी भाईचारे से जोड़ा। उनका यह सोचना था कि आज की अशांत दुनिया को अगर सही दिशा में चलना है, तो बुद्ध के करुणा और अहिंसा के रास्ते पर चलना ही एकमात्र उपाय है।
जलवायु संकट और विकासशील देशों की मुश्किलें
संयुक्त राष्ट्र के इस बड़े मंच पर सिर्फ सांस्कृतिक बातें ही नहीं हुईं, बल्कि प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने उन गंभीर समस्याओं पर भी खुलकर बात की जिनसे आज पूरी दुनिया परेशान है। उन्होंने अपने भाषण में जलवायु संकट, लगातार आ रही प्राकृतिक आपदाओं, बढ़ती वैश्विक असमानता और गरीब तथा विकासशील देशों के सामने खड़ी बड़ी चुनौतियों का मुद्दा उठाया। उन्होंने विशेष तौर पर हिमालय क्षेत्र की नाजुक स्थिति का जिक्र किया और कहा कि पर्यावरण में आ रहे बदलावों से निपटने के लिए सभी देशों को मिलकर काम करने की जरूरत है। इसके अलावा उन्होंने आपदा के समय देशों के बीच सीमा-पार समन्वय बनाने और वैश्विक स्तर पर एक न्यायपूर्ण व्यवस्था स्थापित करने की पुरजोर मांग की ताकि किसी भी देश के साथ अन्याय न हो सके।
अपने पूरे भाषण के दौरान प्रधानमंत्री ने यह साबित करने की कोशिश की कि केवल पैसे और राजनीति से दुनिया की समस्याएं हल नहीं हो सकती हैं। इसके लिए इंसानों के बीच आपसी समझ, सह-अस्तित्व और शांति की भावना का होना बहुत जरूरी है। उन्होंने राजनीतिक और आर्थिक बहसों से ऊपर उठकर पूरी मानवता के कल्याण की कामना की और नेपाल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का संदेश दुनिया के सामने रखा। इस पूरे सम्मेलन के संबंध में अधिक जानकारी के लिए आप हिन्दुस्थान समाचार की आधिकारिक वेबसाइट पर जा सकते हैं जहाँ पत्रकार पंकज दास ने इसकी पूरी रिपोर्टिंग की है।