UN General Assembly: नेतन्याहू के भाषण पर हुआ भारी वॉकआउट, यमन और खाड़ी देशों ने उठाई गंभीर चिंता.

संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के तीसरे दिन हालात उस समय काफी गर्म हो गए जब इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के भाषण के दौरान 77 प्रतिनिधिमंडलों ने हॉल से वॉकआउट कर दिया। यह घटनाक्रम गुरुवार, 24 सितंबर 2026 को सामने आया, जहां दुनिया भर के नेताओं के बीच तीखी बहस देखने को मिली। इस विरोध प्रदर्शन के बाद कूटनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव काफी बढ़ गया है।
नेतन्याहू का कड़ा पलटवार और आरोप-प्रत्यारोप
हॉल से बाहर जाने वाले राजनयिकों पर प्रतिक्रिया देते हुए इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने उन्हें नैतिक कायर करार दिया और कहा कि जिन्हें ऐसा महसूस होता है वे हॉल छोड़कर जा सकते हैं। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने गाजा में नरसंहार के आरोपों को सिरे से खारिज किया और दावा किया कि इजरायल ने ऐसे कृत्यों को रोकने का काम किया है। इसके साथ ही उन्होंने न्यूयॉर्क शहर के मेयर जोहरान ममदानी पर यहूदियों के लिए खतरा पैदा करने वाले आधारभूत झूठ फैलाने का गंभीर आरोप भी लगाया। इसके जवाब में मेयर ममदानी ने कहा कि नेतन्याहू का यह भाषण गाजा में उनकी कार्रवाइयों को सही ठहराने और पर्दा डालने के लिए दिया गया था, जबकि उन पर अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय का गिरफ्तारी वारंट भी लंबित है। यह पूरा विवाद ब्रिटेन, कनाडा, फ्रांस और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों द्वारा फिलिस्तीन को हाल ही में दी गई औपचारिक मान्यता के माहौल के बीच सामने आया है।
यमन का संकट और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मदद की गुहार
एक अन्य महत्वपूर्ण संबोधन में यमन के राष्ट्रपति नेतृत्व परिषद के उपाध्यक्ष अब्दुल्लाह अल-अलिमी बावाज़ीर ने अंतरराष्ट्रीय समर्थन की पुरजोर अपील की। उन्होंने हूती विद्रोहियों की जिद की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि वे मानवीय लड़ाइयों और समझौतों का फायदा उठाकर अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने में लगे हुए हैं। उन्होंने इस बात पर गहरी नाराजगी जताई कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय अभी तक हूती गुठ को आधिकारिक तौर पर आतंकवादी संगठन घोषित करने से हिचकिचा रहा है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क ने भी इस मानवीय संकट पर गहरी चिंता व्यक्त की और बताया कि सितंबर की शुरुआत से लेकर अब तक लड़ाइयों की वजह से 125,000 लोग अपना घर छोड़ने को मजबूर हो चुके हैं। उन्होंने हूती ताकतों द्वारा हिरासत में लिए गए संयुक्त राष्ट्र के 73 कर्मचारियों को तुरंत रिहा करने की मांग की। रिपोर्टों से यह भी पता चला है कि ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के सलाहकारों की मदद से हूतियों ने यमन के मोखा बंदरगाह और परिम द्वीप पर कब्जा कर लिया है।
खाड़ी देशों और कुवैत का कड़ा रुख
दूसरी तरफ कुवैत और अन्य खाड़ी सहयोग परिषद यानी GCC के देश क्षेत्रीय खतरों के खिलाफ एकजुट होकर खड़े हो गए हैं। बहरीन द्वारा जॉर्डन और जीसीसी की ओर से पेश किए गए प्रस्ताव 2817 के बाद, इस पूरे गुट ने ईरानी हमलों और होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री नेविगेशन को मिलने वाले खतरों की कड़ी निंदा की है। इस प्रस्ताव में जून के महीने में कुवैत और बहरीन पर पड़े सीधे हमलों के प्रभावों का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी महासभा को संबोधित करते हुए ईरान को तबाह करने की चेतावनी दी और ईरान समर्थित संघर्षों के क्षेत्रीय प्रभावों पर प्रकाश डाला। उन्होंने सऊदी अरब की होर्मुज बाईपास पाइपलाइन को निष्क्रिय करने और रियाद पर हुए मिसाइल हमलों का भी जिक्र किया, जिससे खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा पर बड़ा सवालिया निशान लग गया है।