संयुक्त राष्ट्र में इसराइल की सदस्यता और अफ्रीका के अधिकारों पर गटेरेस का बड़ा बयान.

संयुक्त राष्ट्र के महासचिव Antonio Guterres ने हाल ही में अल जजीरा के फॉलोअर्स के साथ बातचीत के दौरान दुनिया के दो बड़े और गंभीर मुद्दों पर खुलकर बात की। उन्होंने 81st UN General Assembly के दौरान इसराइल की संयुक्त राष्ट्र में लगातार सदस्यता और सुरक्षा परिषद में अफ्रीकी देशों को स्थाई प्रतिनिधित्व न मिलने के कारणों पर विस्तार से जानकारी दी। आम लोगों और प्रवासियों के बीच भी इन अंतरराष्ट्रीय फैसलों को लेकर काफी चर्चा हो रही है, क्योंकि दुनिया भर में चल रहे तनाव का असर हर जगह देखने को मिलता है।
इसराइल की सदस्यता और संयुक्त राष्ट्र के नियम
इसराइल की संयुक्त राष्ट्र से सदस्यता समाप्त करने या हटाने को लेकर उठ रहे सवालों पर महासचिव ने स्पष्ट किया कि किसी भी देश को बाहर करने के लिए सुरक्षा परिषद की सिफारिश जरूरी होती है। इस प्रक्रिया में पांचों स्थाई सदस्यों यानी China, France, Russia, United Kingdom और United States के पास वीटो पावर होती है। इतिहास में अभी तक किसी भी देश को इस तरह से बाहर नहीं किया गया है। साल 1982 में जॉर्डन ने भी इसराइल की सदस्यता को चुनौती देने का प्रयास किया था, लेकिन वह सफल नहीं हो पाया था। दोनों पक्षों के बीच तनाव लगातार बना हुआ है और हाल ही में 29 मई 2026 को इसराइल के रक्षा मंत्री ने महासचिव को persona non grata घोषित किया था। इसके अलावा 21 सितंबर 2026 को हमास ने फिलिस्तीनी प्रतिनिधिमंडल को वीजा देने से मना करने पर अमेरिका की कड़ी निंदा की थी। महासचिव ने गाजा शांति योजना के लागू होने के तरीकों पर भी सवाल उठाए थे और 17 सितंबर 2026 को वेस्ट बैंक में हो रहे कब्जों को लेकर चेतावनी भी दी थी।
सुरक्षा परिषद में अफ्रीका के प्रतिनिधित्व की मांग
अफ्रीकी देशों को सुरक्षा परिषद में स्थाई जगह देने के मुद्दे पर महासचिव ने अपना समर्थन दोहराया। उन्होंने न्यूयॉर्क में आयोजित पांचवें सालाना ग्लोबल अफ्रीका बिजनेस इनिशिएटिव जिसे 'Unstoppable Africa' कहा जाता है, उसके दौरान यह बात रखी। यह कार्यक्रम 21 सितंबर 2026 को आयोजित हुआ था। इससे पहले 20 सितंबर 2026 को उन्होंने अफ्रीका को उपनिवेशवाद का दोहरा शिकार बताया था। उनका कहना था कि साल 1945 में जब दूसरे विश्व युद्ध के बाद अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं का ढांचा तैयार किया गया था, तब ज्यादातर अफ्रीकी देश गुलाम थे और इसी वजह से उन्हें उस समय बाहर रखा गया। दुनिया की शांति संभालने वाली किसी भी बड़ी संस्था में एक अरब से ज्यादा आबादी वाले महाद्वीप को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। सुरक्षा परिषद के एजेंडे का आधे से ज्यादा हिस्सा अफ्रीकी देशों की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। अफ्रीकी संघ यानी African Union लगातार मांग कर रहा है कि उन्हें वीटो पावर के साथ कम से कम दो स्थाई सीटें और पांच गैर-स्थाई सीटें मिलनी चाहिए। महासचिव ने यह भी कहा कि आज दुनिया एक ऐसे सुरक्षा परिषद की वजह से लगातार बढ़ रही अस्थिरता का सामना कर रही है जो कई मामलों में पूरी तरह लाचार हो चुका है।