UN मुख्यालय के बाहर ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन के खिलाफ भारी प्रदर्शन, मानवाधिकार की उठी मांग.

संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के बाहर न्यूयार्क में 22 और 23 सितंबर 2026 को सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने जोरदार प्रदर्शन किया। जब ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करने के लिए पहुंचे, तो प्रदर्शनकारियों ने देश में लोकतंत्र और मानवाधिकारों की बहाली की मांग उठाई। इस विरोध प्रदर्शन का आयोजन ऑर्गेनाइजेशन ऑफ ईरानी अमेरिकन कम्युनिटीज और नेशनल काउंसिल ऑफ रेजिस्टेंस ऑफ ईरान जैसे संगठनों द्वारा किया गया था। यह पूरा मामला संयुक्त राष्ट्र फैक्ट-फाइंडिंग मिशन की उस रिपोर्ट के बाद गर्माया, जो 21 सितंबर को सामने आई थी। इस रिपोर्ट में साफ कहा गया था कि ईरानी सरकार ने 2025 में शुरू हुए प्रदर्शनों के दौरान भारी क्रूरता दिखाई और 'मानवता के खिलाफ अपराध' किए।
मानवाधिकारों के हनन और रिपोर्ट पर तीखी प्रतिक्रिया
संयुक्त राष्ट्र की इस रिपोर्ट में ईरानी प्रशासन पर कई गंभीर आरोप लगाए गए। इसमें बताया गया कि सरकार ने प्रदर्शनकारियों पर जुल्म ढाते हुए गैर-कानूनी हत्याएं कीं, लोगों को टॉर्चर किया, अंधाधुंध गिरफ्तारियां कीं, इंटरनेट पूरी तरह बंद कर दिया और बच्चों समेत कई प्रदर्शनकारियों को मौत की सजा दी। नेशनल काउंसिल ऑफ रेजिस्टेंस ऑफ ईरान की चुनी हुई राष्ट्रपति मरियम रजावी ने ईरानी प्रतिनिधिमंडल के वहां पहुंचने पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र में ईरान की सीट उन लोगों के पास होनी चाहिए जो देश में लोकतांत्रिक गणराज्य चाहते हैं। उन्होंने मानवाधिकारों का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों को तुरंत बाहर करने की मांग की।
विदेश मंत्री की बैठक और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति
दूसरी तरफ, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराची ने न्यूयार्क में संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस और यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कलास से उच्च स्तरीय मुलाकात की। यूरोपीय संघ की नेता काजा कलास ने ईरान के अंदर हो रहे दमन और राज्य द्वारा दी जा रही फांसी की सजाओं में बढ़ोतरी पर गहरी चिंता जताई। इन बैठकों के दौरान अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे विवाद को सुलझाने के लिए संभावित कूटनीतिक रास्तों पर भी चर्चा हुई, जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति का मुद्दा भी शामिल था।
द्विपक्षीय संबंधों और प्रतिबंधों पर नए खुलासे
अमेरिका और ईरान के आपसी रिश्तों को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया कि अमेरिकी और ईरानी अधिकारियों के बीच तीन घंटे तक चली बैठक बहुत अच्छी रही। इस बातचीत के बाद ईरान ने कथित तौर पर पेशकश की कि यदि अमेरिका अपनी समुद्री नाकाबंदी हटा ले, ईरान की जमी हुई संपत्ति को वापस कर दे और सैन्य कार्रवाई रोक दे, तो वह कुछ ही दिनों में होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोल देगा। हालांकि, राष्ट्रपति ट्रम्प की तरफ से ईरान को पूरी तरह मिटा देने की पुरानी धमकियों पर अमेरिकी सीनेटर बर्नी सैंडर्स ने कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने इस तरह की धमकियों को युद्ध अपराध करार दिया और इस मामले में संसद से दखल देने की अपील की। इसके अलावा, डेनिमार्क के नेतृत्व में कई नॉर्डिक-बाल्टिक देशों और यूनाइटेड किंगडम ने भी ईरान की कार्रवाइयों की कड़ी निंदा की है और कहा है कि देश के भीतर हो रहा यह दमन इस शासन के इतिहास का सबसे घातक और खौफनाक दौर है।