अमेरिका पर लगा युद्ध अपराध का आरोप, संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा.

संयुक्त राष्ट्र समर्थित एक स्वतंत्र जांच मिशन ने गुरुवार, 17 सितंबर 2026 को एक रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि संयुक्त राष्ट्र अमेरिका ने इस साल 28 फरवरी 2026 को ईरान पर किए गए सैन्य हमलों के दौरान युद्ध अपराध किए हो सकते हैं। इस स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय तथ्य-खोज मिशन ने अपनी जांच में यह पाया कि इस बात के पुख्ता आधार मौजूद हैं कि अमेरिका ने मिनाब में एक प्राथमिक स्कूल और लामर्ड में एक स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स पर बिना सोचे-समझे हमले किए। इन घटनाओं के बाद से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस मामले को लेकर चर्चा तेज हो गई है और आम लोगों के बीच भी इसको लेकर चिंता बढ़ गई है।
मिनाब और लामर्ड हमलों की पूरी सच्चाई
रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के मिनाब शहर में स्थित स्कूल पर हुए हमले में दो टोमाहाक मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया था। जांचकर्ताओं ने पाया कि उस जगह पर बच्चों के खेलने का मैदान, साइनबोर्ड और पेंटिंग साफ तौर पर दिखाई दे रहे थे जिससे यह आसानी से पहचाना जा सकता था कि वह एक स्कूल है। मिशन का यह कहना है कि अमेरिकी सेना द्वारा अपने टार्गेट डेटाबेस को अपडेट न करना और उस जगह की सही स्थिति की पुष्टि न करना महज़ एक लापरवाही से कहीं आगे की बात है। ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, इस हमले में 150 से ज्यादा लोगों की जान चली गई, जिनमें करीब 120 बच्चे भी शामिल थे। इसके अलावा लामर्ड के स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स पर हुए एक अन्य हमले में टंगस्टन के छर्रों का इस्तेमाल किया गया, जिससे 22 आम नागरिकों की मौत हो गई। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने लामर्ड हमले की जिम्मेदारी लेने से साफ इनकार कर दिया है, जबकि पेंटागन का यह कहना है कि मिनाब की घटना पर उनकी जांच अभी भी चल रही है। इससे पहले एक अमेरिकी अधिकारी ने यह बात कही थी कि मिनाब का हमला गलत और पुराने कोऑर्डिनेट्स की वजह से हुआ था, जबकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जून 2026 में यह बयान दिया था कि किसी ने भी जानबूझकर स्कूल पर हमला नहीं किया था।
मानवाधिकारों के उल्लंघन और विरोध प्रदर्शनों पर रिपोर्ट
इस रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि ईरानी अधिकारियों ने दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 के दौरान सरकार विरोधी प्रदर्शनों को कुचलने के समय बड़े पैमाने पर मानवता के खिलाफ अपराध किए हो सकते हैं। इसमें बड़े पैमाने पर लोगों की हत्या, बल का अंधाधुंध इस्तेमाल, लोगों को प्रताड़ित करना और उन्हें कानूनी सलाह लेने से रोकना शामिल है। इस मिशन की अध्यक्षता करने वाली सारा हुसैन ने इन हमलों को इस संघर्ष की इंसानी कीमत का एक बेहद दुखद और भयानक रूप बताया है और तुरंत युद्ध रोकने की अपील की है।
व्हाइट हाउस की प्रतिक्रिया और आगे की कार्रवाई
व्हाइट हाउस की प्रवक्ता अन्ना केली ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें पूरी तरह से बकवास बताया है। उनका यह कहना है कि संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद ने मानवाधिकारों के लिए कुछ नहीं किया है और युद्ध अपराधों के लिए सिर्फ और सिर्फ ईरानी शासन जिम्मेदार है। हालांकि इस तथ्य-खोज मिशन के पास किसी भी तरह के आपराधिक मामलों को शुरू करने की न्यायिक ताकत नहीं है, लेकिन इसके द्वारा इकट्ठा किए गए सबूतों का इस्तेमाल देश की अदालतों या अंतरराष्ट्रीय ट्रिब्यूनल में किया जा सकता है। इस पूरी रिपोर्ट को औपचारिक रूप से सोमवार, 21 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के सामने पेश किया जाना है।