संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में सिंध के जल प्रबंधन की खामियां उजागर, सरकारी आंकड़ों पर उठाए सवाल

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में सिंध के जल प्रबंधन सिस्टम की कमियों और सरकारी आंकड़ों में गड़बड़ी का खुलासा हुआ है।

Gautam Sahu28 October 20262 min read0 viewsWorld
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में सिंध के जल प्रबंधन की खामियां उजागर, सरकारी आंकड़ों पर उठाए सवाल

इस्लामाबाद (पाकिस्तान): पाकिस्तान के सिंध प्रांत का जल प्रबंधन सिस्टम गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा है। संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (FAO) की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि पुराने नियमों, अविश्वसनीय सरकारी आंकड़ों और पानी के आवंटन व वास्तविक खपत के बीच बड़े अंतर के कारण यह व्यवस्था प्रभावित हो रही है।

'वॉटर एंड लैंड अकाउंटिंग इन सिंध' नाम की इस स्टडी में प्रांतीय सरकार से अपनी जमीन और जल संसाधनों का व्यापक मूल्यांकन करने की अपील की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, सिंध का जल तंत्र अब केवल पारंपरिक नहर सिंचाई तक सीमित नहीं रहा है। अब शहरी जल आपूर्ति नेटवर्क, स्थानीय बांध, झीलें, जलाशय और पंपिंग सुविधाएं भी पानी के वितरण में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं।

रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि मौजूदा निगरानी और संचालन तंत्र इन बदलावों के साथ तालमेल बिठाने में नाकाम रहे हैं। सार्वजनिक क्षेत्र के आंकड़ों में कमी से जल मूल्यांकन गलत हो सकता है, जिससे नीतिगत निर्णय और विकास की प्राथमिकताएं प्रभावित होने का खतरा है।

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खास तौर पर क्रॉप रिपोर्टिंग सर्विस (CRS) को लेकर बड़ी चिंता जताई गई है। रिपोर्ट के अनुसार, इसकी जमीन की सीमाओं, फसल सर्वेक्षण के तरीकों, सैंपलिंग प्रक्रियाओं और जिला स्तर के कवरेज में तत्काल सुधार की जरूरत है। यह भी पाया गया कि सिंचित भूमि के CRS अनुमान, सिंध सिंचाई विभाग द्वारा दर्ज नहर कमांड क्षेत्रों से मेल नहीं खाते हैं।

FAO ने बताया कि आधिकारिक तौर पर आवंटित पानी और लोगों या विभिन्न क्षेत्रों तक पहुंचने वाली वास्तविक मात्रा के बीच अंतर बढ़ता जा रहा है। पीने के पानी के बुनियादी ढांचे, औद्योगिक आपूर्ति नेटवर्क और स्थानीय भंडारण सुविधाओं में किए गए निवेश का परिचालन रिकॉर्ड में सही ढंग से उल्लेख नहीं किया गया है। इसके अलावा, सर्दियों की सिंचाई के लिए झीलों और छोटे बांधों से लिए जाने वाले पानी का दस्तावेजीकरण भी ठीक से नहीं हुआ है।

मौजूदा संचालन प्रक्रियाओं की आलोचना करते हुए रिपोर्ट में कहा गया कि इन्हें मुख्य रूप से गुरुत्वाकर्षण आधारित नहर सिंचाई के लिए बनाया गया था। इनमें पंपिंग सिस्टम और वैकल्पिक भंडारण सुविधाओं का पर्याप्त ध्यान नहीं रखा गया है। रिपोर्ट में सिफारिश की गई है कि सिंध सरकार कृषि, शहरी बस्तियों, उद्योग और पर्यावरण संसाधनों, जिनमें आर्द्रभूमि और मैंग्रोव शामिल हैं, के लिए नियमित वार्षिक और मौसमी जल खाते तैयार करे।

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