Saudi पर हमलों के खिलाफ UN सख्त, सऊदी अरब को अपने बचाव का पूरा हक.

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने 19 सितंबर 2026 को एक बड़ा और महत्वपूर्ण औपचारिक बयान जारी किया है। इस बयान में साफ तौर पर कहा गया है कि सऊदी अरब को अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अपनी रक्षा करने का पूरा और inherent अधिकार है। संयुक्त राष्ट्र ने हौथी समूह द्वारा लगातार किए जा रहे हमलों की कड़ी निंदा की है। ये हमले आम नागरिकों, नागरिक बुनियादी ढांचे और ऊर्जा सुविधाओं को निशाना बनाकर किए जा रहे हैं, जिसमें कई महिलाओं और बच्चों को चोटें भी आई हैं। परिषद ने इन सभी हमलों को पूरी तरह से गलत बताया है और सऊदी अरब के साथ अपनी पूरी एकजुटता दिखाई है।
समुद्री सुरक्षा और लाल सागर के हालात
सुरक्षा परिषद ने सिर्फ जमीनी हमलों पर ही चिंता नहीं जताई, बल्कि लाल सागर और बाब अल-मैंडाब जलडमरूमध्य में कमर्शियल जहाजों पर मंडरा रहे खतरों का भी जिक्र किया। परिषद के सदस्यों ने मांग की है कि हौथी समूह तुरंत अपनी सैन्य गतिविधियों को रोके और समुद्री सुरक्षा नियमों का सम्मान करे। इसके साथ ही, संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन का पालन करने की भी बात कही गई है। परिषद ने Resolution 2216 (2015) और उसके बाद के सभी आदेशों को पूरी तरह से लागू करने पर जोर दिया है, जिसमें हौथी नेताओं पर हथियारों का प्रतिबंध और कड़े प्रतिबंध लगाना शामिल है.
मानवीय संकट और विस्थापित लोग
सुरक्षा मामलों के अलावा, संयुक्त राष्ट्र ने यमन में चल रहे संघर्ष के मानवीय असर पर भी गहरी चिंता व्यक्त की है। रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर 2026 की शुरुआत से लेकर अब तक यमन में कम से कम 125,000 लोग अपना घर छोड़कर जाने को मजबूर हुए हैं। इसके साथ ही, संयुक्त राष्ट्र ने सभी कैदियों को तुरंत और बिना किसी शर्त के रिहा करने की अपनी मांग को फिर से दोहराया है, जिसमें संयुक्त राष्ट्र के 73 कर्मचारी भी शामिल हैं जिन्हें हिरासत में लिया गया है.
सऊदी अधिकारियों का आधिकारिक बयान
संयुक्त राष्ट्र में सऊदी अरब के स्थायी प्रतिनिधि डॉ. अब्दुलअजीज अल-ওয়াসেল ने 17 सितंबर 2026 को सुरक्षा परिषद के सामने अपना पक्ष रखा था। उन्होंने जोर देकर कहा था कि वैश्विक शांति बनाए रखने के लिए अंतरराष्ट्रीय कानून और यूएन चार्टर का पालन करना सबसे ज्यादा जरूरी है। यह बयान सऊदी मंत्रिपरिषद के 15 सितंबर के उस फैसले के बाद आया था, जिसमें देश की क्षेत्रीय अखंडता और नागरिकों की रक्षा करने के संप्रभु अधिकार को पूरी तरह से सही ठहराया गया था। सुरक्षा परिषद यमन के लिए संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत हंस ग्रुंडबर्ग के उन प्रयासों का लगातार समर्थन कर रही है, जिनका मकसद बातचीत के जरिए शांति स्थापित करना है। इस संबंध में QNA की रिपोर्ट में भी सभी जरूरी अपडेट्स साझा किए गए हैं, जिसमें साफ बताया गया है कि केवल ताकत के इस्तेमाल से स्थाई शांति हासिल नहीं की जा सकती है।