हूती हिरासत में UN कर्मी मोहम्मद अल-शामी की मौत, संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने जताया गहरा दुख
संयुक्त राष्ट्र कर्मी मोहम्मद अल-शामी की हूती हिरासत में मौत से UN चीफ ने गहरा दुख जताया है। उन्होंने सभी बंदियों की रिहाई की मांग की है।

न्यूयॉर्क: संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने हूती अधिकारियों की हिरासत में यमनी नागरिक और UN मानवाधिकार कार्यालय के कर्मचारी मोहम्मद अल-शामी की मौत पर गहरा दुख और आक्रोश व्यक्त किया है। अल-शामी को 6 जून 2024 को हिरासत में लिया गया था।
उनकी मौत की पुष्टि हाल ही में हुई है, लेकिन रिपोर्टों के मुताबिक उनकी मृत्यु एक महीने से अधिक समय पहले हो गई थी। उनके परिवार को इस घटना की सूचना देने में काफी देरी की गई।
UN प्रवक्ता स्टीफन डujarिक ने बताया कि महासचिव गुटेरेस मौत की परिस्थितियों को लेकर स्पष्टता की कमी से परेशान हैं। संयुक्त राष्ट्र ने हिरासत के दौरान बार-बार अनुरोध किया था, लेकिन हूती अधिकारियों ने अल-शामी की सेहत या उनके जीवित होने का कोई सबूत नहीं दिया।
UN मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर तुर्क ने इसे एक हृदयविदारक और विनाशकारी क्षति बताया है। उन्होंने इस मामले में तत्काल, स्वतंत्र और गहन जांच की मांग की है। तुर्क ने पूर्ण पारदर्शिता बरतने और सभी मेडिकल व हिरासत रिकॉर्ड जारी करने की अपील की है।
यमन सरकार के मानवाधिकार मंत्री मशदल मोहम्मद उमर ने इस घटना के लिए हूती मिलिशिया को पूरी तरह जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने इसे कर्मचारी का अपहरण, गायब होना और अंततः उनकी मौत करार दिया है।
हूती हिरासत में संयुक्त राष्ट्र कर्मचारी की यह दूसरी मौत है। इससे पहले फरवरी 2025 में वर्ल्ड फूड प्रोग्राम (WFP) के एक कर्मचारी की मौत हुई थी।
उत्तरी यमन पर शासन कर रहे हूती अधिकारियों ने फिलहाल लगभग 70 UN कर्मियों को हिरासत में रखा हुआ है। इनमें कुछ पूर्व कर्मचारी और मानवीय व नागरिक समाज संगठनों से जुड़े लोग भी शामिल हैं।
संयुक्त राष्ट्र ने हूतियों के उन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है जिनमें हिरासत में लिए गए कर्मियों को अमेरिका और इजरायल के लिए जासूसी करने वाला बताया गया था। महासचिव गुटेरेस ने सभी हिरासत में लिए गए कर्मियों की तत्काल और बिना शर्त रिहाई की मांग दोहराई है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता से वंचित सभी व्यक्तियों के साथ मानवीय व्यवहार होना चाहिए और उनके मानवाधिकारों का सम्मान किया जाना चाहिए।