पूर्व यरूशलम में UNRWA के वोकेशनल ट्रेनिंग सेंटर पर इजराइल का कब्जा, यूएन कमिश्नर ने की कड़ी निंदा

संयुक्त राष्ट्र राहत और कार्य एजेंसी UNRWA के कार्यवाहक कमिश्नर-जनरल क्रिश्चियन सांडर्स ने पूर्वी यरूशलम में एजेंसी के कलंदिया वोकेशनल ट्रेनिंग सेंटर पर इजरायली कब्जे की कड़ी निंदा की है। उन्होंने इस कार्रवाई को एजेंसी को कमजोर करने और फिलिस्तीनी अधिकारों को नुकसान पहुंचाने का एक सुनियोजित प्रयास करार दिया है।
घटना का विवरण और तारीख
यह जब्ती मंगलवार, 25 अगस्त 2026 को हुई, जब इजरायली बलों ने काफर अकाब इलाके में स्थित इस प्रमुख यूएनआरडब्लूए सुविधा पर छापा मारा। बलों ने सभी कर्मचारियों को वहां से बाहर निकाल दिया और उनके वापस लौटने पर पूरी तरह रोक लगा दी। इसके बाद परिसर के प्रांगण में इजरायली झंडा फहरा दिया गया। बुधवार, 26 अगस्त 2026 तक इजराइल ने वहां अपनी मौजूदगी को और मजबूत कर लिया और येरुशलम नगरपालिका के तकनीकी दलों ने वहां रखरखाव और जीर्णोद्धार का काम शुरू कर दिया, जिससे वहां एक नगरपालिका शैक्षणिक परिसर स्थापित करने की योजना का संकेत मिलता है।
इजरायली अधिकारियों का बयान और कानूनी हवाला
ऑपरेशन में शामिल इजरायली राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतमार बेन-ग्विर ने सोशल मीडिया पर घोषणा की कि येरुशलम और इजराइल में एजेंसी के लिए कोई जगह नहीं है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने पुष्टि की कि यह अभियान उनके आदेशों के तहत चलाया गया था। उन्होंने 2024 के एक संसदीय कानून का हवाला दिया जो इजराइल और कब्जे वाले पूर्वी येरुशलम में यूएनआरडब्लूए के संचालन पर प्रतिबंध लगाता है। सरकार ने 7 अक्टूबर 2023 के हमले में एजेंसी के कर्मचारियों की संलिप्तता का आरोप लगाते हुए इस कदम को सही ठहराया है, हालांकि स्वतंत्र जांच में इन दावों का समर्थन करने के लिए कोई ठोस सबूत नहीं मिला है।
अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रिया और चिंताएं
संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता स्टेफन दुजारिक ने बताया कि मई 2026 के बाद से केंद्र में इजरायली अधिकारियों द्वारा अनधिकृत प्रवेश का यह पांचवां मामला है। उन्होंने अन्य उल्लंघनों का भी जिक्र किया, जिसमें शेख जर्राह परिसर को जब्त करना और ध्वस्त करना तथा अन्य यूएनआरडब्लूए सुविधाओं की बिजली-पानी जैसी यूटिलिटी सेवाओं को काटना शामिल है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इस घुसपैठ पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए दोहराया कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत संयुक्त राष्ट्र के परिसर किसी भी तरह के हस्तक्षेप से सुरक्षित और मुक्त हैं। फिलिस्तीनी प्रेसीडेंसी और विदेश मंत्रालय ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है और इस निकासी को फिलिस्तीनी उपस्थिति और अधिकारों के संबंध में अंतरराष्ट्रीय मानकों का खुला उल्लंघन बताया है।