East Jerusalem में UNRWA का एकमात्र वोकेशनल कॉलेज बंद होने की कगार पर, इस्राइली सैन्य कार्रवाई से मचा हड़कंप।

पूर्वी जेरूसलम में संयुक्त राष्ट्र राहत और कार्य एजेंसी (UNRWA) द्वारा चलाया जाने वाला एकमात्र वोकेशनल कॉलेज इस्राइली सैन्य अभियानों के बाद गंभीर संकट में आ गया है। इस कार्रवाई के बाद से पूरे इलाके में तनाव का माहौल बना हुआ है और स्थानीय लोगों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता जताई जा रही है। 29 अगस्त 2026 को इस्राइली सैनिकों ने इस जगह से वापसी कर ली थी, लेकिन इसके बावजूद उस क्षेत्र के ऊपर इस्राइली ड्रोन लगातार निगरानी रख रहे हैं। वर्तमान में यह परिसर पूरी तरह से बंद और लोगों की पहुंच से बाहर है, जहां संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों ने संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचने और लूटपाट के सबूत मिलने की बात कही है।
छापेमारी और परिसरों से निकाले गए कर्मचारी
यह पूरा विवाद 25 अगस्त 2025 को तब और बढ़ गया जब इस्राइली सेना और पुलिस के अधिकारी राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-गवीर के साथ इस कॉलेज परिसर में पहुंचे। इन लोगों ने वहां मौजूद करीब 40 कर्मचारियों को जबरन बाहर निकाल दिया। वेस्ट बैंक में यूएनआरडब्ल्यूए के मामलों के निदेशक रोलैंड फ्रेडरिक ने इस पूरी घटना को एक अवैध और जबरन कब्जा बताया। इसके बाद 28 अगस्त तक इस्राइली सेना वहां से हट गई थी, लेकिन पीछे टूटी-फूटी संपत्ति और नुकसान के निशान छोड़ गई। साल 1952 में स्थापित यह संस्थान हर साल करीब 340 फिलिस्तीनी शरणार्थियों को मुफ्त तकनीकी और व्यावसायिक प्रशिक्षण देता था और यहां से पास होने वाले 90 प्रतिशत युवाओं को नौकरी मिल जाती थी। यूएनआरडब्ल्यूए के अनुसार इस कॉलेज की संपत्ति की कुल कीमत 5 मिलियन डॉलर से अधिक है।
इस्राइली अधिकारियों का पक्ष और नया प्लान
इस्राइली मंत्री इतामार बेन-गवीर और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय का कहना है कि इस जगह को जेरूसलम नगरपालिका द्वारा एक शैक्षणिक और सामुदायिक परिसर के रूप में बदल दिया जाएगा। मंत्री बेन-गवीर ने साफ कहा कि इस एजेंसी का जेरूसलम में कोई स्थान नहीं है और इसके लिए अक्टूबर 2024 में नेसेट (इस्राइली संसद) में कानून भी पास किए गए थे ताकि इस्राइल की सीमा के अंदर इस एजेंसी की गतिविधियों को पूरी तरह रोका जा सके। इस्राइली विदेश मंत्रालय का दावा है कि यह पूरी जमीन ज्यूइश नेशनल फंड की है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो रही है कड़ी निंदा
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इस सैन्य कार्रवाई की कड़ी निंदा की है और इस परिसर को तुरंत संयुक्त राष्ट्र को वापस सौंपने की मांग की है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत संयुक्त राष्ट्र की सुविधाओं की सुरक्षा पर जोर दिया। इसके अलावा दुनिया के 12 देशों, जिनमें यूरोपीय संघ के आठ देश भी शामिल हैं, ने फिलिस्तीन के विदेश मंत्रालय के साथ मिलकर इस कार्रवाई के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया है। कॉलेज बंद होने के बावजूद यूएनआरडब्ल्यूए ने नए शैक्षणिक सत्र के लिए रजिस्ट्रेशन 1 सितंबर तक खुले रखे थे और एजेंसी इस कॉलेज को फिर से खोलने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।