यूपीआई पर नया मर्चेंट ट्रांजैक्शन फीस लगाने का आरोप, आलोचकों ने कहा अमरीकी दबाव का असर।

Praggya Singh sabal17 September 20261 min read22 viewsIndia
यूपीआई पर नया मर्चेंट ट्रांजैक्शन फीस लगाने का आरोप, आलोचकों ने कहा अमरीकी दबाव का असर।

भारत में डिजिटल भुगतान के सबसे लोकप्रिय माध्यम UPI पर 0.4% मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR लगाने को लेकर एक नई बहस शुरू हो गई है। आलोचकों का आरोप है कि ₹2,000 से अधिक के यूपीआई मर्चेंट लेनदेन पर यह शुल्क किसी स्वतंत्र फैसले का परिणाम नहीं है, बल्कि इसके पीछे अमेरिकी सरकार का भारी दबाव था। इस नीतिगत बदलाव ने देश भर के आम लोगों और वित्तीय विशेषज्ञों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है, क्योंकि यूपीआई को हमेशा से भारत की डिजिटल ताकत का मुख्य आधार माना जाता रहा है।

अमरीकी कंपनियों को फायदा पहुँचाने का दावा

जानकारों का कहना है कि भारत में यूपीआई के तेजी से बढ़ते दायरे ने अमेरिकी कार्ड नेटवर्क कंपनियों जैसे Visa और Mastercard के बिजनेस को बुरी तरह प्रभावित किया था। भारत में लोग तेजी से यूपीआई का इस्तेमाल करने लगे थे, जिसके कारण इन विदेशी कार्ड नेटवर्कों के उपयोग में भारी गिरावट दर्ज की गई थी। आलोचकों का यह भी दावा है कि देश की मौजूदा सरकार ने बाहरी अमेरिकी नेतृत्व के प्रभाव के आगे झुकते हुए बड़े यूपीआई लेनदेनों पर इन शुल्कों को लगाने की अनुमति दे दी है।

आम जनता की जेब पर पड़ेगा असर

इस नीति बदलाव को लेकर यह तर्क दिया जा रहा है कि यह कदम मुख्य रूप से अमेरिकी कंपनियों के व्यावसायिक हितों की रक्षा करता है। पहले जिस प्रणाली को पूरी तरह से मुफ्त और आम आदमी के अनुकूल बताया जाता था, उस पर इस तरह के शुल्क लगने से भारतीय नागरिकों पर नया वित्तीय बोझ पड़ रहा है। देश के विभिन्न हिस्सों में इस बात पर चर्चा हो रही है कि इस प्रकार के शुल्क डिजिटल भुगतान के सफर को कैसे प्रभावित करेंगे और क्या इससे छोटे दुकानदारों और ग्राहकों की मुश्किलें आगे चलकर बढ़ने वाली हैं।

GulfHindi की हर खबर सबसे पहलेJoin
Share:

Comments

Leave a comment