US Ambassador Huckabee का बड़ा बयान, गाज़ा के लोगों को जबरन हटाने की इस्राइल की कोई योजना नहीं

अमेरिका के इस्राइल में राजदूत Mike Huckabee ने 5 सितंबर 2026 को साफ कर दिया है कि इस्राइल की ऐसी कोई योजना नहीं है जिसके तहत गाज़ा के लोगों को उनकी मर्जी के खिलाफ वहां से हटाया जाए। राजदूत ने यह बात तब कही जब वह अधिकृत वेस्ट बैंक के एक कस्बे Turmus Ayya के दौरे पर थे, जहां बड़ी संख्या में अमेरिकी नागरिक रहते हैं। इस दौरे के दौरान उन्होंने यह भी जोर दिया कि इस्राइल सरकार की यह जिम्मेदारी बनती है कि वह वेस्ट बैंक के लोगों की सुरक्षा और संरक्षा पूरी तरह से सुनिश्चित करे और उन्होंने हिंसक चरमपंथी सेटलर्स पर कानूनी कार्रवाई करने की अपनी पुरानी मांग को फिर से दोहराया।
इस्राइली मंत्रियों के बयानों में दिखा था विरोधाभास
राजदूत का यह बयान इस्राइल सरकार के भीतर से आ रहे अलग-अलग और विरोधाभास बयानों के ठीक बाद सामने आया है। इससे पहले 3 सितंबर 2026 को इस्राइल के रक्षा मंत्री Israel Katz ने घोषणा की थी कि देश ने फलस्तीनियों को गाज़ा पट्टी से बाहर भेजने के लिए ऑपरेशनल प्लान तैयार किए हैं, हालांकि यह सब अमेरिका की मंजूरी और दूसरी जगहों पर बसाने के ठिकानों मिलने पर ही निर्भर करता है। इसके अलावा, उसी दिन इस्राइल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री Itamar Ben-Gvir ने गाज़ा के लोगों के 'स्वैच्छिक प्रवास' के लिए सात साल की एक योजना का प्रस्ताव रखा था, जिसमें इस पूरी प्रक्रिया को संभालने के लिए एक अलग सरकारी मंत्रालय बनाने की बात भी शामिल थी।
अमेरिकी विदेश विभाग और ह Hamas का रुख
इन तमाम डेवलप्मेंट्स के जवाब में अमेरिकी विदेश विभाग यानी US State Department ने 5 सितंबर 2026 को अपनी आधिकारिक स्थिति को फिर से स्पष्ट किया। विभाग ने साफ शब्दों में कहा कि वॉशिंगटन डीसी गाज़ा के लोगों को जबरन हटाने, देश से बाहर निकालने या फिर जबरन दूसरी जगह भेजने की किसी भी योजना का बिल्कुल समर्थन नहीं करता है। विभाग के प्रवक्ता ने इस बात पर जोर दिया कि वे युद्धविराम के उस ढांचे के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं जो वहां के निवासियों को अपने घरों में ही रहने के लिए प्रोत्साहित करता है। दूसरी तरफ, हमास के प्रवक्ता Hazem Qassem ने 5 सितंबर 2026 को इन इस्राइली अधिकारियों के प्रस्तावों को बेहद खतरनाक विकास करार दिया। उन्होंने इस्राइली नेतृत्व पर राजनीतिक और चुनावी फायदों के लिए ऐसे प्लान दोबारा सामने लाने का आरोप लगाया और अरब तथा इस्लामिक देशों से अपील की कि वे इन प्रस्तावों के खिलाफ मिलकर कड़ा कदम उठाएं।