US और ईरान के बीच तनाव तेज, अमेरिका के ऑफर को तेहरान ने किया खारिज

Sushma Kumari27 September 20263 min read5 viewsWorld
US और ईरान के बीच तनाव तेज, अमेरिका के ऑफर को तेहरान ने किया खारिज

अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव के बीच एक बड़ी बात सामने आई है। 27 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका के राजदूत Mike Waltz ने इस बात की पुष्टि की है कि अमेरिकी सरकार ने ईरान के नागरिक परमाणु कार्यक्रम के लिए यूरेनियम देने का ऑफर दिया था। लेकिन तेहरान ने इस प्रस्ताव को पूरी तरह से ठुकरा दिया है। इस समय दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बातचीत रुकी हुई है और हालात को संभालने की कोशिशें की जा रही हैं, जिसमें मुख्य रूप से कतर मध्यस्थता की भूमिका निभा रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव की वजह से इस पूरे इलाके में बेचैनी का माहौल बना हुआ है, जिसका असर खाड़ी देशों में रहने वाले आम लोगों और प्रवासियों पर भी पड़ सकता है।

अमेरिका और ईरान आमने-सामने

अमेरिकी राजदूत ने एनबीसी के शो 'मीट द प्रेस' और सीएनएन के 'स्टेट ऑफ द यूनियन' में बातचीत के दौरान बताया कि राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के एक हालिया शांति प्रस्ताव को स्वीकार करने से मना कर दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति का कहना था कि ईरान की तरफ से जो मांगें रखी गई थीं, उनमें अरबों डॉलर के प्रतिबंधों को हटाने, फ्रीज किए गए फंड को रिलीज करने और होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने के बदले नौसेना की नाकाबंदी खत्म करने की बातें शामिल थीं। राष्ट्रपति ट्रंप के मुताबिक ईरान की ये शर्तें ऐसी थीं कि वे शुरुआत में ही सब कुछ मांग रहे थे। इसके साथ ही उन्होंने ईरान की नीयत पर शक जताया और साफ किया कि इस समय होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिका का पूरा नियंत्रण बना हुआ है।

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ईरान का पक्ष और परमाणु गतिविधियां

दूसरी तरफ संयुक्त राष्ट्र महासभा में बोलते हुए ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने इस बात से इनकार किया कि उनका देश परमाणु हथियार बनाना चाहता है। हालांकि इसके साथ ही उन्होंने अपने देश के नागरिक परमाणु कार्यक्रम पर किसी भी तरह की पाबंदी लगाने से साफ मना कर दिया। ईरानी राष्ट्रपति ने अंतरराष्ट्रीय कानून और परमाणुप्रसार संधि के दायरे में रहते हुए 60 प्रतिशत तक समृद्ध यूरेनियम के स्टॉक को छोड़ने की इच्छा जरूर जताई, बशर्ते उनके ऊपर किसी भी तरह की ताकत का इस्तेमाल न किया जाए। इसके बावजूद ईरान के बड़े अधिकारियों का यही कहना है कि वे यूरेनियम संवर्धन के अपने अधिकार या इसे बाहर भेजने के मामले में कोई भी समझौता नहीं करेंगे।

युद्ध जैसे हालात और कूटनीति की गुंजाइश

ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने भी 27 सितंबर को यह बयान दिया कि उनका देश अमेरिका के साथ किसी भी संभावित भयानक युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार है, लेकिन इसके बावजूद वे बातचीत के रास्ते बंद नहीं करना चाहते हैं। उन्होंने दोहराया कि हालात सुधारने के लिए सबसे पहले अमेरिका को अपनी शत्रुता और नौसेना की नाकाबंदी को खत्म करना होगा। वहीं दूसरी ओर, संयुक्त राष्ट्र की परमाणु एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले कुछ महीनों में ईरान ने हथियारों के करीब पहुंचने वाले यूरेनियम के अपने भंडार को 50 प्रतिशत तक बढ़ा लिया है। एजेंसी ने यह भी बताया कि 2025 और 2026 के दौरान हुए सैन्य हमलों में ईरान के इसफहान, फोर्डो और नतांज जैसे कई परमाणु ठिकाने क्षतिग्रस्त हो गए थे, लेकिन वे जमीन के बहुत अंदर होने के कारण आज भी सुरक्षित हैं और सिर्फ हवाई हमलों से उन्हें पूरी तरह नष्ट करना बहुत मुश्किल काम है।

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