अमेरिका और ईरान के बीच तनाव तेज, मिसाइल और ड्रोन हमलों से मिडिल ईस्ट में मची हलचल.

मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा तनाव अब और ज्यादा गंभीर रूप ले चुका है। 30 अगस्त से 2 सितंबर 2026 के बीच दोनों देशों की सेनाओं के बीच ताबड़तोड़ मिसाइल और ड्रोन हमले देखने को मिले। इस बड़ी सैन्य हलचल ने खाड़ी देशों में रहने वाले आम लोगों और प्रवासियों की चिंता बढ़ा दी है, खासकर वे लोग जो इस क्षेत्र में काम करते हैं और जिनके परिवार भारत में रहते हैं। अमेरिकी सेना और ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC के बीच हुए इन हमलों ने पूरे इलाके में सुरक्षा के हालात को पूरी तरह बदल दिया है।
अमेरिकी कार्रवाई और ईरान के ठिकाने
घटना की शुरुआत 30 अगस्त को हुई जब अमेरिकी सेना ने लारक द्वीप पर ईरान के रॉकेट लॉन्चरों को निशाना बनाया। इसके बाद यूएस सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM की मंजूरी से ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर ताबड़तोड़ हमले किए गए। इन हमलों में ईरान के एयर डिफेंस साइट्स, रडार सिस्टम, समुद्री जहाज और कम्यूनिकेशन हब को निशाना बनाया गया। अमेरिकी सेना का कहना था कि यह कार्रवाई फारसी खाड़ी के होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षा को खतरे में डालने और अमेरिकी सैनिकों पर हमले की कोशिशों के जवाब में की गई थी। इसके बाद 1 और 2 सितंबर को ईरान के अहवाज और अघाजारी शहरों के पास भी मिसाइल हमले की खबरें सामने आईं।
ईरान का पलटवार और खाड़ी देशों पर असर
इस अमेरिकी कार्रवाई के जवाब में ईरान के IRGC ने भी पीछे न हटते हुए अमेरिका के ठिकानों पर भारी बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन दागे। ईरान ने जॉर्डन में स्थित प्रिंस हसन एयर बेस पर भारी मिसाइल हमला करने का दावा किया, जहां अमेरिकी ड्रोन रखे हुए थे। जॉर्डन के अधिकारियों ने भी इस बात की पुष्टि की कि उनके आसमान में 13 बैलिस्टिक मिसाइलें आईं जिनमें से 10 को हवा में ही रोक लिया गया जबकि 3 सुनसान इलाकों में गिरीं। इसके अलावा बहरीन में मौजूद अमेरिकी ठिकाने शेख ईसा एयर बेस पर भी ड्रोन से हमले किए गए। संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE ने भी अपने समुद्री क्षेत्र के ऊपर एक संदिग्ध ईरानी ड्रोन को मार गिराया और इस घटना की कड़ी निंदा की।
आगे की चेतावनी और अमेरिकी प्रतिक्रिया
फॉक्स न्यूज को दिए गए एक इंटरव्यू में वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने साफ किया कि अमेरिकी अड्डों को कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ है और ज्यादातर मिसाइलों को बीच में ही रोक लिया गया था। हालांकि अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने इस मामले पर सख्त रुख अपनाते हुए चेतावनी दी कि अगर ईरान ने अपनी हरकतों को जारी रखा तो उनके देश को पूरी तरह खत्म कर दिया जाएगा। दूसरी तरफ, ईरान के IRGC ने भी अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का कड़ा बदला लेने की धमकी दी है। इस तरह के हालात को देखते हुए खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीय प्रवासियों को भी अपनी सुरक्षा को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है ताकि किसी भी अनहोनी से बचा जा सके।