UAE और खाड़ी देशों पर बढ़ा नया संकट, अमेरिका ने ईरान के खिलाफ उठाया सख्त कदम.

Sushma Kumari31 August 20263 min read40 viewsUAE
UAE और खाड़ी देशों पर बढ़ा नया संकट, अमेरिका ने ईरान के खिलाफ उठाया सख्त कदम.

अमेरिका के वित्त मंत्रालय ने ईरान के खिलाफ एक बहुत बड़ा और सख्त फैसला लिया है, जिसके तहत अब हर हफ्ते ईरान पर नए प्रतिबंध लगाए जाएंगे। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने रविवार, 30 अगस्त 2026 को यह ऐलान किया कि ईरान की अर्थव्यवस्था को पूरी तरह तोड़ने के लिए एक नया अभियान शुरू किया गया है। इस अभियान को अंदरूनी तौर पर 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' नाम दिया गया है, जिसे 24 अगस्त 2026 को लॉन्च किया गया था। इस नीति का मुख्य मकसद ईरान के उन सभी वित्तीय रास्तों को हमेशा के लिए बंद करना है, जिनके जरिए वह दुनिया के बाकी देशों के साथ कारोबार कर रहा था। अमेरिका के इस कदम से खाड़ी देशों और खासकर वहां रहने वाले प्रवासियों के बीच हलचल तेज हो गई है।

बैंकिंग सेक्टर पर सबसे बड़ा प्रहार

उत्तर कैरोिना के एशविल में जी-20 बैठकों से पहले बात करते हुए अमेरिकी ट्रेजरी सचिव ने साफ कर दिया कि जो भी बैंक या संस्था ईरान के पैसों के लेनदेन में मदद करेगी, उसे अमेरिकी डॉलर सिस्टम से बाहर कर दिया जाएगा। अमेरिकी प्रशासन का यह नया नियम मुख्य तौर पर बैंकिंग सेक्टर को निशाना बना रहा है। दुनिया भर के बड़े वित्तीय संस्थानों पर दबाव बनाया जा रहा है कि वे ईरान के साथ अपने सभी रिश्ते तुरंत खत्म कर दें, वरना उन्हें डॉलर में कारोबार करने की अनुमति नहीं मिलेगी। सचिव ने चेतावनी देते हुए कहा कि जो लोग ऐसे लेन-देन में शामिल हैं, उनके लिए अब समय बहुत तेजी से निकल रहा है।

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यूएई और मिस्र के बैंकों पर कार्रवाई का असर

यह पूरा मामला तब और गर्मा गया जब हाल ही में अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने मिस्र के बनक मिस्र (Banque Misr) की यूएई शाखा पर सवाल उठाए। आरोप लगाया गया कि इस बैंक ने ईरान के गुप्त बैंकिंग नेटवर्क के लिए करीब 1.8 अरब डॉलर की रकम प्रोसेस की थी। इस अमेरिकी कार्रवाई के जवाब में यूएई और मिस्र के केंद्रीय बैंकों ने मिलकर 30 अगस्त 2026 को एक संयुक्त बयान जारी किया। इस बयान में दोनों देशों ने नियमों का पूरी तरह पालन करने और आपसी तालमेल के साथ काम करने की बात कही है, ताकि क्षेत्रीय व्यापार पर कोई बुरा असर न पड़े।

शिपिंग, सोना और टेक्नोलॉजी पर भी शिकंजा

सिर्फ बैंकों तक ही नहीं, बल्कि इस अमेरिकी अभियान का दायरा अब डिजिटल संपत्तियों, तकनीक, सोने, विमानन और शिपिंग सेक्टर तक फैल चुका है। हाल ही में ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) से जुड़ी 60 संस्थाओं, व्यक्तियों और जहाजों पर कड़े प्रतिबंध लगाए गए हैं। अमेरिकी प्रशासन ने यह भी संकेत दिए हैं कि चीन और भारत जैसे बड़े देशों पर भी नजर रखी जा रही है, जो ईरान से लगातार तेल खरीदते हैं। यदि इन देशों ने तेल खरीदना बंद नहीं किया, तो अमेरिका इन पर भी कड़े प्रतिबंध लगाने के सभी विकल्पों पर विचार कर रहा है।

क्षेत्रीय तनाव और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज की स्थिति

इन आर्थिक प्रतिबंधों के साथ-साथ मध्य पूर्व में सैन्य तनाव भी अपने चरम पर पहुंच गया है। जुलाई 2026 के मध्य से अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी के कारण ईरान से सीधे तौर पर होने वाले तेल शिपमेंट पर रोक लगी हुई है। इसके अलावा, लारक द्वीप पर अमेरिकी हमलों और जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर आईआरजीसी के जवाबी हमलों से माहौल और ज्यादा तनावपूर्ण हो गया है। ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहसेन रजाई ने अमेरिकी प्रतिबंधों का साथ देने वाले देशों को गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है और नाकाबंदी जारी रहने पर स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को बंद करने की धमकी भी दी है।

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