अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी से ईरान के IRGC को भारी वित्तीय नुकसान, 25 अरब डॉलर का तेल निर्यात रुका

वॉशिंगटन: अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने बताया कि अमेरिका द्वारा की गई नौसैनिक नाकाबंदी ने ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) को बहुत भारी वित्तीय नुकसान पहुंचाया है। एडमिरल कूपर के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने ईरान को कम से कम 25 अरब डॉलर मूल्य के कच्चे तेल के निर्यात को रोकने में सफलता हासिल की है।
कमांड ने कहा कि यह वह पैसा था जिसका इस्तेमाल ईरान समर्थित मिलिशिया समूहों, आपराधिक नेटवर्क और अमेरिकी बलों व क्षेत्रीय सहयोगियों के खिलाफ शत्रुतापूर्ण गतिविधियों के लिए किया जाता। अब यह वित्तीय दबाव एक नाजुक स्तर पर पहुंच गया है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, क्षेत्र में ईरान से जुड़े मिलिशिया समूह अपने सैनिकों को भुगतान नहीं कर रहे हैं ताकि वह पैसा IRGC को भेजा जा सके। वहीं, IRGC को भी अपने कर्मियों को वेतन देने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
सैन्य कार्रवाई के साथ-साथ अमेरिकी सरकार ने करीब 350 मिलियन डॉलर की क्रिप्टोकरेंसी संपत्ति भी फ्रीज कर दी है। इसका मकसद सशस्त्र समूहों को फंड देने या सैन्य बुनियादी ढांचे को फिर से खड़ा करने की तेहरान की क्षमता को रोकना है।
इससे पहले 15 अक्टूबर 2026 को अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने एक नया प्रतिबंध पैकेज लागू किया था। इसमें उन व्यक्तियों, नेटवर्क और 17 जहाजों को निशाना बनाया गया है जो ईरानी कच्चे तेल, पेट्रोलियम उत्पादों और पेट्रोकेमिकल्स के परिवहन में शामिल हैं।
ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट नाम के इस अभियान का उद्देश्य ईरान के शैडो फ्लीट को खत्म करना और मिसाइल निर्माण व साइबर हमलों से जुड़े अवैध राजस्व स्रोतों को रोकना है। ट्रेजरी विभाग के एक अधिकारी ने इसे ईरान के अवैध समुद्री बुनियादी ढांचे पर अब तक का सबसे बड़ा प्रहार बताया है।
यह नाकाबंदी आधिकारिक तौर पर 14 जुलाई 2026 को फिर से लागू की गई थी। इससे पहले 2026 के ईरान युद्ध को समाप्त करने के लिए एक समझौता हुआ था, लेकिन इस्लामाबाद वार्ता विफल होने के बाद अमेरिका ने 8 जुलाई 2026 को उस समझौते को रद्द कर दिया था। एडमिरल कूपर की कमान में यह नाकाबंदी पहली बार 13 अप्रैल 2026 को प्रभावी हुई थी।
ट्रेजरी अधिकारियों का अनुमान है कि ईरान के पास फिलहाल करीब 2 करोड़ बैरल कच्चा तेल है, जो मुख्य रूप से सिंगापुर, मलेशिया और चीन के पास जहाजों पर मौजूद है। हालांकि, इन जहाजों से तेल की लोडिंग और अनलोडिंग का काम पूरी तरह बंद हो गया है।
दूसरी ओर, ऑब्सीडियन रिस्क एडवाइजर्स के मैनेजिंग प्रिंसिपल ब्रेट एरिक्सन ने इन कदमों के प्रभाव पर संदेह जताया है। उन्होंने तर्क दिया कि ईरान पहले ही समुद्र के जरिए अपना काफी तेल भेज चुका है, इसलिए नए प्रतिबंधों का व्यावहारिक असर सीमित हो सकता है। उन्होंने इसे हेडलाइन बनाने वाला आर्थिक युद्ध करार दिया।