अमेरिका और मध्य एशिया के बीच आर्थिक साझेदारी का नया अध्याय शुरू हुआ, उज्बेकिस्तान में जुटे 300 से ज्यादा बिजनेस लीडर

Gautam Sahu19 October 20262 min read0 viewsWorld
अमेरिका और मध्य एशिया के बीच आर्थिक साझेदारी का नया अध्याय शुरू हुआ, उज्बेकिस्तान में जुटे 300 से ज्यादा बिजनेस लीडर

समरकंद (उज्बेकिस्तान): अमेरिका और मध्य एशियाई देशों के बीच आर्थिक रिश्तों को मजबूत करने के लिए एक नई पहल शुरू की गई है। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने उज्बेकिस्तान के समरकंद शहर के दौरे के दौरान अमेरिका और मध्य एशिया के बीच बढ़ती आर्थिक साझेदारी पर जोर दिया।

यह दौरा अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के साथ किया गया। इस दौरान उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री बख्तियोर सैदोव और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की उपाध्यक्ष सैदा मिर्ज़ियोयेवा भी मौजूद रहे। राजदूत गोर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बताया कि समरकंद के ऐतिहासिक रेजिस्तान स्क्वायर में 300 से अधिक बिजनेस लीडर शामिल हुए, ताकि आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाया जा सके।

सर्जियो गोर ने कहा कि वे अमेरिका और मध्य एशियाई आर्थिक साझेदारी का अगला अध्याय लिख रहे हैं। उन्होंने विदेश मंत्री बख्तियोर सैदोव और मार्को रूबियो के साथ हुई बातचीत का जिक्र करते हुए कहा कि इस साझेदारी को व्यापार, निवेश, सुरक्षित कनेक्टिविटी और महत्वपूर्ण खनिजों, तकनीक व ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग के जरिए ठोस नतीजों में बदलने पर चर्चा हुई।

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मार्को रूबियो का समरकंद आगमन रविवार को हुआ था, जहां सर्जियो गोर ने उनका स्वागत किया और इसे एक ऐतिहासिक दिन बताया। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य व्यापार, निवेश और रणनीतिक सहयोग को बढ़ावा देना है। राजदूत गोर ने बताया कि C5+1 मंत्रिस्तरीय बैठक और अमेरिका-उज्बेकिस्तान बिजनेस काउंसिल से वाणिज्यिक संबंधों के और गहरे होने और नए अवसर खुलने की उम्मीद है।

यूरोन्यूज के मुताबिक, रूबियो सोमवार को C5+1 ढांचे के तहत पांच मध्य एशियाई देशों के विदेश मंत्रियों से मिलेंगे। इस बैठक में व्यापार, निवेश, महत्वपूर्ण खनिजों और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, रूबियो का यह दौरा 17 से 22 अक्टूबर तक चलेगा।

उज्बेकिस्तान के बाद मार्को रूबियो भारत का दौरा करेंगे। वे मुंबई और जामनगर में वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों और बिजनेस लीडरों से मिलेंगे। इस यात्रा का मकसद अमेरिका-भारत रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करना, ऊर्जा सहयोग के अवसरों को तलाशना और वाणिज्यिक निवेश को बढ़ावा देना है।

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