अमेरिका और ईरान के बीच तनाव तेज, चीन के रुख पर टिकी डोनाल्ड ट्रंप की नजर.

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार Mark Pfeifle ने ईरान के खिलाफ चल रहे अमेरिकी तनाव को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने बताया कि अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की रणनीति की असली परीक्षा इस बात पर निर्भर करती है कि China इस मामले पर क्या कदम उठाता है। इस पूरी स्थिति पर दुनिया भर के देशों की नजरें टिकी हुई हैं क्योंकि इसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ रहा है।
ईरान के खिलाफ सबसे सख्त पाबंदियां
ट्रंप प्रशासन ने पिछले दिनों ईरान के खिलाफ अपनी आर्थिक कार्रवाई तेज कर दी है। ट्रेजरी सचिव Scott Bessent ने इन नए उपायों को इतिहास के सबसे सख्त प्रतिबंध बताया है। इन कदमों का मुख्य उद्देश्य ईरान के तेल तस्करी नेटवर्क, करेंसी स्वॉप लाइन्स और फर्जी कंपनियों पर नकेल कसना है। हालांकि, अमेरिका अभी चीन से कच्चा तेल खरीदने वाले खरीदारों पर सीधे तौर पर कोई अतिरिक्त प्रतिबंध लगाने से बच रहा है, लेकिन इस नीति को एक रणनीतिक हथियार के रूप में सुरक्षित रखा गया है ताकि बीजिंग पर ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने का दबाव बनाया जा सके।
चीन और ईरान के बीच तेल व्यापार में भारी गिरावट
अमेरिकी प्रतिबंधों और नाकाबंदी के चलते ईरान से चीन आने वाले कच्चे तेल के आयात में भारी कमी दर्ज की गई है। आंकड़े बताते हैं कि अक्टूबर 2024 में यह आंकड़ा रोजाना लगभग 1.9 million barrels per day यानी 19 लाख बैरल प्रतिदिन के चरम स्तर पर पहुंच गया था। इसके बाद जुलाई और अगस्त 2026 के दौरान यह घटकर केवल 530,000 bpd के आसपास रह गया। इस साल फरवरी 2026 में आयात 1.57 million bpd और मार्च 2026 में 1.47 million bpd रिकॉर्ड किया गया था, जो जुलाई में गिरकर 823,000 bpd और अगस्त में गिरकर 534,000 bpd पर आ गया। साल 2026 के दौरान चीन को मिलने वाला कुल ईरानी तेल औसतन 1.2 million bpd रहा है, जिसमें पिछले साल की तुलना में मामूली गिरावट आई है।
रूस और ब्राजील से तेल खरीद रहा है चीन
ईरान से मिलने वाले तेल की कमी को पूरा करने के लिए चीन ने अपने दूसरे विकल्पों पर ध्यान देना शुरू कर दिया है। बीजिंग ने अब अपना पूरा ध्यान Brazil, Iraq और Russia से तेल खरीदने पर लगा दिया है। साल 2026 के पहले सात महीनों के दौरान रूस से चीन को होने वाला कच्चे तेल का निर्यात सालाना आधार पर 14.9% बढ़ गया है, जिससे रूस चीन का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बन गया है। इसके अलावा ब्राजील और अंगोला ने भी इस साल की पहली तिमाही में चीन को अपने निर्यात में बढ़ोतरी की है। विशेषज्ञों का मानना है कि चीन इस स्थिति में काफी सावधानी से आगे बढ़ रहा है और परोक्ष रूप से तेहरान का समर्थन जारी रखे हुए है।