अमेरिका और चीन के बीच बाल-बाल बची जंग, AI की एक गलती ने मिडिल ईस्ट में खड़ा कर दिया था बड़ा संकट।

Aanya19 September 20262 min read31 viewsWorld
अमेरिका और चीन के बीच बाल-बाल बची जंग, AI की एक गलती ने मिडिल ईस्ट में खड़ा कर दिया था बड़ा संकट।

मिडिल ईस्ट में अमेरिका और चीन के बीच एक बड़ा सैन्य टकराव टल गया जब साल 2026 के वसंत में एक चीनी जहाज को रोकने की अमेरिकी सैन्य योजना को एन वक्त पर रोक दिया गया। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI आधारित एक खुफिया रिपोर्ट में यह गलत दावा किया गया था कि इस जहाज पर परमाणु हथियार बनाने से जुड़े सामान ले जाए जा रहे हैं। यह पूरी घटना ईरान के साथ चल रहे संघर्ष के दौरान सामने आई जब हवाई में तैनात US Special Operations Command Pacific के एक विश्लेषक ने इस मामले में काम किया था।

AI चैटबॉट के इस्तेमाल से हुआ गलत आकलन

विश्लेषक ने क्लासिफाइड सिग्नल्स इंटेलिजेंस को पब्लिक डेटा के साथ मिलाने के लिए एक AI चैटबॉट का इस्तेमाल किया था। इसी गलत तकनीक के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला गया कि वह जहाज ईरानी परमाणु कार्यक्रम के लिए परमाणु सामग्री लेकर जा रहा था। इसके बाद AI ने इस झूठी जानकारी को एक पारंपरिक खुफिया रिपोर्ट के रूप में तैयार किया और इसे बड़े अधिकारियों के पास भेज दिया गया। इस गलत रिपोर्ट के आधार पर अमेरिकी सेना ने जहाज को जबरन रोकने की तैयारी शुरू कर दी थी और सैनिकों को बोर्डिंग ऑपरेशन के लिए तैयार कर लिया गया था।

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तनाव टला लेकिन उठे गंभीर सवाल

इस ऑपरेशन को अंजाम देने से ठीक पहले गलती का पता चल गया जिससे वाशिंगटन और बीजिंग के बीच एक खतरनाक युद्ध जैसी स्थिति टल गई। स्थिति से जुड़े सूत्रों के अनुसार वह खुफिया जानकारी पूरी तरह से झूठी थी और इससे दोनों देशों के बीच सशस्त्र संघर्ष भड़क सकता था। इस घटना के बाद अमेरिकी सेना और खुफिया समुदाय के भीतर AI के इस्तेमाल को लेकर गंभीर चिंताएं बढ़ गई हैं। पेंटागन हालांकि जिम्मेदार AI सिद्धांतों को मानता है जिसके तहत सिस्टम को ट्रेस करने योग्य, विश्वसनीय और नियंत्रित होना जरूरी है, लेकिन रिपोर्ट्स बताती हैं कि AI डेटा की पुष्टि के लिए कोई एक समान मानक मौजूद नहीं है।

प्रशासन की प्रतिक्रिया और पाबंदियां

यह घटना सैन्य अभियानों के दौरान सामने आने वाली AI की गलतियों यानी हॉलुसिनेशन के मामलों का ही एक हिस्सा है। इस पूरी घटना पर US Special Operations Command Pacific, पेंटागन और US Central Command की तरफ से कोई भी आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। जिस दिन यानी 18 सितंबर 2026 को सीएनएन ने इस घटना की रिपोर्ट सबके सामने रखी, उसी दिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने व्हाइट हाउस से सीएनएन, एमएसएनओडब्ल्यू और पोलिटिको पर प्रतिबंध लगा दिया।

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