अमेरिका में डीजल की कीमतें 6 डॉलर प्रति गैलन के पार, ईरान के साथ चल रहे युद्ध का असर.

अमेरिका में डीजल के दाम आसमान छू रहे हैं और पहली बार कीमतें 6 डॉलर प्रति गैलन के पार पहुंच गई हैं। यह स्थिति अमेरिका और इसराइल गठबंधन तथा ईरान के बीच चल रहे लगातार सैन्य संघर्ष की वजह से पैदा हुई है। रॉयटर्स और अन्य आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 10 सितंबर 2026 तक की स्थिति के अनुसार, 7 सितंबर को समाप्त हुए सप्ताह में राष्ट्रीय औसत डीजल की कीमत $5.967 दर्ज की गई। कुछ जगहों पर तो यह दाम $5.98 तक रिकॉर्ड किए गए हैं।
पश्चिम तट पर सबसे ज्यादा असर
इस संकट का सबसे ज्यादा असर अमेरिका के पश्चिम तट पर देखने को मिला है, जहां कीमतें बढ़कर $6.987 हो गई हैं। अगर कैलिफोर्निया को हटा दिया जाए, तब भी यह कीमत $6.314 पर बनी हुई है। इस महंगाई की वजह से आम जनता और कारोबारियों की जेब पर भारी बोझ पड़ रहा है। अगस्त के महीने में अमेरिका की थोक महंगाई दर बढ़कर 5.4% साल-दर-साल पहुंच गई, जिसमें डीजल की कीमतों में आई 24.1% की भारी तेजी का बहुत बड़ा हाथ है।
आम जनता पर पड़ा 100 अरब डॉलर का अतिरिक्त बोझ
जब से यह संघर्ष 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ है, तब से लेकर पिछले छह महीनों में अमेरिकी उपभोक्ताओं को पेट्रोल और डीजल पर कुल 100 अरब डॉलर अतिरिक्त खर्च करने पड़े हैं। इसका मतलब है कि प्रति परिवार औसतन $763 का अतिरिक्त खर्च आया है। इस हालात को देखते हुए यूएस एनर्जी इंफॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन (EIA) ने साल 2026 के लिए डीजल का अनुमानित भाव बढ़ाकर $5.07 प्रति गैलन कर दिया है और साल 2027 के लिए यह अनुमान $4.40 तय किया है। इसके पीछे मुख्य वजह डीजल के स्टॉक का बहुत कम होना बताया जा रहा है।
वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर संघर्ष का प्रभाव
अमेरिका इसे 'Operation Epic Fury' नाम दे रहा है, जिसका पूरी दुनिया के एनर्जी मार्केट पर बहुत बुरा असर पड़ा है। 10 सितंबर तक ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 105 डॉलर प्रति बैरल से ज्यादा हो गई। पिछले 24 घंटों के दौरान, ईरानी बलों ने जॉर्डन में स्थित एक अमेरिकी बेस पर क्लस्टर म्यूनिशियन बैलिस्टिक मिसाइलों से कई अमेरिकी युद्धक विमानों को नुकसान पहुंचाया है। इसके अलावा, ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास 10 जहाजों पर हमलों का दावा किया है। इसके जवाब में अमेरिकी हमलों में ईरान के पांच तेल टैंकरों को निशाना बनाया गया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने यह भी कन्फर्म किया कि ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी के लिए 96 कमर्शियल जहाजों को दूसरे रास्तों पर भेजा गया है, जबकि ईरान समर्थक हौथी बलों ने यमन के मोखा बंदरगाह पर कब्जा कर लिया है।
राजनयिक तनाव और परमाणु ठिकानों पर चेतावनी
इस बीच कूटनीतिक मोर्चे पर भी तनाव काफी बढ़ गया है। 10 सितंबर को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बयान दिया कि उन्हें उम्मीद है कि आगामी चुनाव के बाद यह युद्ध खत्म हो जाएगा। साथ ही उन्होंने ईरान के 'पिक्सऐक्स माउंटेन' परमाणु ठिकाने पर संभावित सैन्य कार्रवाई के संकेत भी दिए। इसी दिन इसराइल के रक्षा मंत्री इसराइल कैट्ज ने किसी भी तरह की आक्रामकता के खिलाफ 'शक्तिशाली जवाब' देने की चेतावनी जारी की। उधर, इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) ने आधिकारिक तौर पर ईरान को उसके परमाणु नियमों का पालन न करने के मामले में यूएन सिक्योरिटी काउंसिल को रेफर कर दिया है। इस पूरी खबर की विस्तृत जानकारी Reuters की रिपोर्ट से ली गई है।