हॉर्मूज जलडमरूमध्य पर ईरान और ओमान के समझौते को अमेरिका ने नकारा, तनाव के बीच खाड़ी देशों में बड़ी हलचल

हॉर्मूज जलडमरूमध्य के रास्ते को लेकर इस समय दुनिया भर में तनाव काफी ज्यादा बढ़ गया है और इसी बीच अमेरिका की तरफ से एक बड़ा बयान सामने आया है। अमेरिकी सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बुधवार, 27 अगस्त 2026 को साफ कर दिया है कि ईरान और ओमान के बीच इस क्षेत्र को लेकर जो भी समझौते हुए हैं, उनका वाशिंगटन के लिए कोई मतलब नहीं है। अमेरिका का साफ कहना है कि इन समझौतों से उसे कोई दिलचस्पी नहीं है और वह क्षेत्रीय सुरक्षा को अपने हिसाब से ही देखेगा। इस पूरे मामले ने खाड़ी देशों में रहने वाले लोगों और काम करने वाले प्रवासियों के बीच एक नई चिंता पैदा कर दी है क्योंकि इस रास्ते से व्यापार और तेल की आवाजाही पर सीधा असर पड़ता है।
ईरान और ओमान का समझौता और अमेरिकी प्रतिक्रिया
इससे पहले इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के प्रवक्ता होसैन मोहेब्बी ने ऐलान किया था कि तेहरान और मस्कट ने जलडमरूमध्य के पानी और ट्रांजिट फीस को लेकर एक रेवेन्यू-शेयरिंग समझौता पक्का कर लिया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि अमेरिका इस पूरी प्रक्रिया में रुकावटें डालने की कोशिश कर रहा है। ईरान और ओमान ने 26 अगस्त को एक संयुक्त बयान जारी कर इस बात की पुष्टि की थी कि वे एक अस्थायी नेविगेशनल कॉरिडोर और खदानों को साफ करने के लिए एक संयुक्त प्रोजेक्ट पर चर्चा कर रहे हैं। लेकिन इसके तुरंत बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 27 अगस्त को दोहराया कि जलडमरूमध्य अभी भी खुला हुआ है और अमेरिकी बलों ने वहां मौजूद सभी खदानों को सफलतापूर्वक हटा दिया है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव करोलियन लेविट ने भी 27 अगस्त को यह स्पष्ट कर दिया कि अरब सागर में अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी अभी भी जारी है और अमेरिका का इस क्षेत्र पर पूरा नियंत्रण बना हुआ है।
जहाजों पर हमले और सुरक्षा का हाल
क्षेत्र में सुरक्षा की स्थिति बेहद खराब और अस्थायित्व से भरी हुई है। यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन (UKMTO) ने 27 अगस्त को एक चेतावनी जारी की थी जिसमें बताया गया कि ओमान के पास एक अज्ञात प्रोजेक्टाइल द्वारा एक तेल टैंकर को निशाना बनाया गया। हालांकि आग बुझा ली गई है, लेकिन इस हफ्ते इस क्षेत्र में किसी कमर्शियल जहाज पर हमले की यह दूसरी घटना है। इस तरह की घटनाओं से वहां काम करने वाले नाविकों और कामगारों की जान पर लगातार खतरा बना हुआ है, जिसका असर भारत और अन्य देशों से Gulf जाने वाले लोगों पर भी पड़ सकता है।